CrimeIndia- World देश-दुनिया

झज्जर गुरूकुल में कुकर्म के शिकार बालक के परिजनों ने छोड़ा शहर, हुए बिहार रवाना

गुरूकुल के प्राचार्य व प्रबंधन पर लगाया अनैतिक कार्यों को बढ़ावा देने का आरोप

भिवानी, 21 जून । गुरूकुल झज्जर में कथिततौर पर कुकर्म का शिकार हुए एक बालक के परिजनों ने आज भारी मन से यह कहते हुए भिवानी में अपना घर छोड़ दिया कि बेटे के केस की न्यायालय में पैरवी के दौरान उन पर पड़ रहे निरंतर दबाव के चलते वे ऐसा करने पर मजबूर हैं। पीडि़त बालक के पिता श्रीकृष्ण मिश्रा जो कि भिवानी की कपड़ा मील में बतौर मजदूर कार्यरत रहे हैं, का कहना है कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

श्रीकृष्ण ने झज्जर गुरूकुल के प्राचार्य विजय पाल पर अनैतिक कार्यों में शामिल होने तथा अनैतिक कार्य करने वालों को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए गुरूकुल में सरकारी प्रशासक नियुक्त भी करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि पिछले लगभग 2 दशक से गुरूकुल के प्राचार्य विजयपाल व अन्य कई आचार्यों ने अनैतिक कार्यों को बढ़ावा देकर गुरूकुल की गरिमा को तार-तार कर दिया है।

गुरूकुल में शिक्षा देने की बजाय बड़ी संख्या में अनैतिक कार्य होते हैं जिसका शिकार मेरा पुत्र भी हो चुका है। इन अनैतिक कार्यों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस जो भी करता है उसे प्रताडि़त किया जाता है। मैं भी उनमें से एक हूं जिसने झज्जर गुरूकुल के खिलाफ आवाज बुलंद की है और मुझे इसके लिए धमकियां दी जा रही हैं परिणामस्वरूप मैंने यहां भिवानी में अपना कार्य तो पहले ही छोड़ दिया और अब मुझे शहर छोडऩे पर भी मजबूर होना पड़ रहा है। मैं अपनी जान बचाकर बिहार जाकर अपनी लड़ाई अन्याय के खिलाफ जारी रखूंगा।
उन्होंने कहा कि मेरा बेटा वर्ष 2015 में गुरूकुल झज्जर में पढ़ता था जो कि वहां के आचार्य के कुकर्म का शिकार हुआ। उसी दौरान दो अन्य बच्चों के कुकर्म का मामला भी सामने आया था। धन-बल के दबाव के चलते प्राचार्य विजयपाल के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जबकि वे पूरे मामले में संलिप्त थे। पुलिस ने केवल एक आचार्य के खिलाफ ही एफ.आई.आर. नं. 421/15 के तहत मामला दर्ज करके इतिश्री कर ली। मुझ पर निरंतर मामला वापस लेने का दबाव बनाया जाता है। आए दिन धमकियां मिलती हैं, इन्हीं धमकियों से तंग आकर मैंने हरियाणा छोडऩे का फैसला लिया।

गौरतलब है कि गत दिनों झज्जर गुरूकुल में एक अनुसूचित जाति के बालक को प्रताडि़त करने का मामला भी सुर्खियों में आया था। इस मामले में अनुसूचित जातियों का प्रतिनिधिमंडल कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदेश के राज्यपाल से भी मिला था।

श्रीकृष्ण ने कहा कि झज्जर गुरूकुल में प्राचार्य विजयपाल के नेतृत्व में बच्चों को शिक्षा देने की बजाय बंधुवा मजदूर बनाकर रखा जाता है। उनसे पूरा-पूरा दिन मजदूरी करवाई जाती है। खेतों में फसल कटाई के अलावा पशुओं का गोबर भी उन्हीं से एकत्र करवाया जाता है। काम न करने पर बच्चों को बंद कमरे में यातनाएं दी जाती हैं। आचार्य विजयपाल व अन्य आचार्य वहां पढऩे वाले मासूम बच्चों को एकांत कमरों में ले जाकर घंटों-घंटों तक प्रताडि़त करते हैं। इन बच्चों के साथ अनैतिक कार्यों की सूचनाएं भी हैं, जिसकी विस्तार से जांच होनी चाहिए और विजयपाल सहित वहां कार्यरत अन्य आचार्यों व बच्चों की मैडिकल जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

उन्होंने कहा कि झज्जर गुरूकुल के प्राचार्य विजयपाल जो कि खुद को ब्रह्मचारी बताते हैं उनकी विशेषतौर पर मैडिकल जांच होनी चाहिए। अगर वे जांच में पाकसाफ निकलते हैं तो मैं सारे आरोप वापिस लेने को तैयार हूं।

उन्होंने गुरूकुल में गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए जितना भी अनुदान आता है उसका भी दुरूपयोग किया जा रहा है। गुरूकुल में रखी जा रही लगभग 300 गायों का दूध बच्चों को पिलाने की बजाय रसुखदार लोगों व गुरूकुल के प्रबंधकों तथा बाजार में बेचा जाता है।

क्या कहते हैं गुरूकुल के प्राचार्य गुरूकुल के प्राचार्य विजय पाल ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का मामला न्यायालय में है और किसी प्रकार के हस्तक्षेप का प्रश्र ही नहंीं उठता। उन्होंने यह भी कहा कि मुझे बिना बात बीच में घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लगता है श्रीकृष्ण किसी बहकावे में आकर संस्था की छवि खराब कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब कभी भी किसी बच्चे अथवा अभिभावक की ओर से शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी जांच की जाती है और आवश्यक कार्रवाई की जाती है।

Donate Now
Back to top button