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राजा अनंगपाल तोमर की बिरादरी पर प्रश्न उठाना राजपूत समाज का अपमान: राजा दिग्विजय सिंह पाटन

तोमर कुल के पाटन मुखिया ने कहा कि राजा अनंगपाल के खिलाफ सांसद डॉ सत्यपाल सिंह की टिप्पणी चिंताजनक

    • बागपत से भाजपा के सांसद डॉ सत्यपाल सिंह ने जयपुर में अपने जातीय सम्मेलन में मंच से दावा किया कि अनंगपाल तोमर जाट थे।
    • संसद सदस्य और मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त की तोमर राजवंश के बारे में गलत बयानी जातिगत घृणा उकसाऊ
    • एक साल पहले एक गुज्जर संगठन ने अनंगपाल तोमर के बारे में भी ऐसे ही दावे किए थे

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि सम्राट अनंगपाल-द्वितीय के तीन पुत्र थे – अमजी, सालिवाहन और तेजपाल। उनके बेटे राजा तेजपाल उनके उत्तराधिकारी बने, उनके अन्य दो बेटे राजस्थान के सीकर चले गए जहां तोमरों ने सांभर-अजमेर के शाही चौहानों से लड़ते हुए एक क्षेत्र बनाया था। जैसलमेर के भट्टी राजपूतों के अधीन अमजी तोमर पोखरण के जागीरदार बने। अमजी पोखरण प्रसिद्ध लोक-देवता बाबा रामदेव तोमर के पूर्वज थे। सालिवाहन ने पूर्वी राजस्थान में तंवरावाटी की स्थापना की, जिसकी राजधानी पाटन (सीकर ) बनी। पाटन शाही परिवार को सभी तोमर कबीले के मुखिया के रूप में लिया जाता है।
    जंगशेर राणा चंडीगढ़  

    तोमर राजवंश के पुरोधा दिल्ली संस्थापक राजा अनंगपाल तोमर की बिरादरी को लेकर उठाए जा रहे सवालों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए तंवर राजवंश पाटन राज परिवार नीमका थाना राव दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह राजपूत समाज और विशेषकर तोमर वंश के लिए अपमानजनक है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बागपत से भाजपा के सांसद डॉ सत्यपाल सिंह ने जयपुर में अपने जातीय सम्मेलन में मंच से दावा किया कि अनंगपाल तोमर जाट थे। अपने भाषण में उन्होंने जाट युवाओं को संबोधित करते हुए यह कहा कि अनंगपाल तोमर जाट थे और क्षत्रिय समाज ने उन्हें गलत तरीके से राजपूत बना दिया।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह सुनना अपमानजनक होने के साथ-साथ चिंताजनक भी था कि एक संसद सदस्य और मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त सार्वजनिक रूप से तोमर राजवंश के बारे में गलत सूचना फैला इस तरह जातिगत घृणा को भड़काने वाले बयान दे सकते हैं। एक साल पहले एक गुज्जर संगठन ने अनंगपाल तोमर के बारे में भी ऐसे ही दावे किए थे। आज के समय में क्षत्रिय महापुरुषों को जातिगत भावनाओं के तहत वर्गीकृत किया जा रहा है। इससे केवल भ्रम फैल रहा है और बिना बात के समाज में जातीय विघटन पैदा हो रहा है। आजकल नेता और कई जातिगत संगठन पहले किसी स्थानीय क्षत्रिय व्यक्ति के बिरादरी बदलते हैं , उनके वंशजों के विरोध के बावजूद भी। फिर क्षत्रिय समुदाय पर ही आरोप लगाते हैं कि उन्होंने हमारे समाज के महापुरुष को अपना बना लिया। इसके बाद इस आधार पर विभिन्न समुदायों को क्षत्रिय समुदाय के खिलाफ भड़काने का काम किया जाता है।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि तोमर वंश के सरदार (मुख्य परिवार) होने के नाते यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं आपने वंश के लोगों का नेतृत्व करते हुए सर्व समाज के समक्ष अपने तोमर वंश की विस्तृत जानकारी देकर सभी भ्रम दूर करूं।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि सम्राट अनंगपाल-द्वितीय के तीन पुत्र थे – अमजी, सालिवाहन और तेजपाल। उनके बेटे राजा तेजपाल उनके उत्तराधिकारी बने, उनके अन्य दो बेटे राजस्थान के सीकर चले गए जहां तोमरों ने सांभर-अजमेर के शाही चौहानों से लड़ते हुए एक क्षेत्र बनाया था। जैसलमेर के भट्टी राजपूतों के अधीन अमजी तोमर पोखरण के जागीरदार बने। अमजी पोखरण प्रसिद्ध लोक-देवता बाबा रामदेव तोमर के पूर्वज थे। सालिवाहन ने पूर्वी राजस्थान में तंवरावाटी की स्थापना की, जिसकी राजधानी पाटन (सीकर ) बनी। पाटन शाही परिवार को सभी तोमर कबीले के मुखिया के रूप में लिया जाता है। विभिन्न तोमर वंश उत्तर हरियाणा में भी पाए जाते हैं, जिनमें भिवानी, करनाल और कुरुक्षेत्र उनके केंद्र हैं। यूपी के तोमर मुख्य रूप से हापुड़, मेरठ, साट्ठा चौरासी विशेषकर रोहिलखंड में। तोमरों की पठानिया शाखा ने नूरपुर-पठानकोट पर शासन किया, जबकि जर्राल तोमरो ने रजौरी पर शासन किया। चंबल और मालवा में जिस इलाके में तोमर राजपूत बसे हैं, उसे तोमरघार कहा जाता है। ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर एक प्रसिद्ध राजपूत राजा थे जिन्होंने सिकंदर लोदी से कई युद्ध भी लड़े थे । उनके वंशज राजा रामशाह तोमर ने हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की सेवा की, जहां वे वीरगति को प्राप्त हुए।

    दिग्विजय सिंह जी ने कहा कि सभी तोमर वंश के लोग राजपूत हैं और तोमर वंश का किसी गैर-राजपूत समुदाय से कोई संबंध नहीं है, चाहे वह जाट हो या गुजर। ब्रिटिश काल और खासकर 1947 के बाद से सभी को राजपूत नाम अपनाने की स्वतंत्रता है लेकिन किसी की पहचान या इतिहास को बल, अफवाह और धमकी के माध्यम से हथियाना राष्ट्र की संस्कृति और सभ्यता के लिए निंदनीय है। वंश और बिरादरी सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक भाईचारा होता है।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि वास्तव में, यदि उनके दावों में कोई सच्चाई है, तो यह पूछना उचित होगा कि तुर्क या मुगल इतिहासकारों ने इन समुदायों में तोमर वंश का एक बार भी उल्लेख क्यों नहीं किया, जबकि इन जातियों के वर्तमान तोमर नामधारी दिल्ली के आसपास ही पाए जाते हैं ? अंग्रेजों के जमाने के गजेटियर्स, इन तथाकथित तोमरों के बारे में सबसे पुराने वृत्तांत हैं मगर इनमें भी इनके बुजुर्गों ने जो के दावे किए वो का उनके वर्तमान राजनेताओं से मौलिक रूप से भिन्न हैं?

    सिंह ने कहा कि किसी भी मानव समाज में परिवार के बाद अगली इकाई हमेशा वंश होता है। हमारे वंश की पहचान और इतिहास का इस तरह का उल्लंघन, हमारे मानवाधिकारों का उल्लंघन है। राव दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य और समाज की चुप्पी केवल दोयम दर्जे का व्यवहार दर्शाती है। यह यह भी दर्शाता है कि कुछ समुदायों को दूसरों की पहचान और इतिहास को छिन्न-भिन्न करने के लिए प्रचार, ब्लैकमेल और डराने-धमकाने के लिए पूरी छूट दे दी गई है। यह लोकतंत्र की मर्यादा के विपरीत है, इसलिए हमारा आग्रह है कि इस तरह की अनैतिकता के खिलाफ अब उचित कार्रवाई की जाए।

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