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पंजाब में दिग्गज व कांग्रेस हाशिये पर, आप ने रचा इतिहास

Giants and Congress marginalized in Punjab, AAP created history

राजेंद्र कुमार
सिरसा,10 मार्च। हरियाणा व राजस्थान की सरहद से सटते प्रांत पंजाब में दिल्ली के बाद दूसरी बार पं्रचड बहुमत लेकर आप ने दूसरे दलों के लिए एक लंबी लकीर खिंच दी है। पंजाब राज्य के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार आप ने 92 सीटों पर जीतकर एक नया अध्याय लिखा है। इसी के साथ पंजाब प्रदेश के दिग्गज नेता एवं पूर्व में मुख्यमंत्री रहे कई नेताओं को भी जमीन देखने पर मजबूर कर दिया है। अब पंजाब के चुनाव परिणाम का असर दिसंबर 2023 में आसन्न राजस्थान विधानसभा व उसके बाद हरियाणा में भी देखने का मिल सकता है,जिससे इन प्रदेशों के विभिन्न दलों के नेताओं में सुगबुगाहट व चिंता देखने को मिली।
    हालांकि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने चार अन्य प्रदेशों में सत्ता फिर हथियाने का काम किया है मगर राजनीति के जानकारो की माने तो पंजाब में आप को दिल्ली से बाहर पंजाब में मिले प्रचंड बहुमत से भाजपाई भी चिंतित हैं।
अब सुनने को मिल रहा है कि आप अब राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने का काम करेगी।
   1947 से अब तक 17 चुनाव विधानसभा के हुए जिनमें आठ बार के चुनावों में 14 बार कांग्रेस समर्थित मुख्यमंत्री बने। चार बार अकाली दल बादल,एक-एक बार अकाली दल संत पार्टी व पंजाब जनता पार्टी सत्तारूढ़ हुई। वहीं दूसरी ओर आतंकवाद की प्रकाष्ठा झेलने वाले पंजाब प्रदेश के लोगों ने 8 बार राष्ट्रपति शासन भी झेला। 17 वीं विधानसभा के चुनाव परिणामों में 92 सीटों पर आप प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर अब तक के सर्वाधिक सीटों का रिकार्ड दर्ज किया वहीं कांग्रेस को 18,अकाली दल बादल 04,भाजपा को 02 व एक अन्य प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
सत्तारूढ़ दल कांग्रेस को मात्र 17 सीटें मिलने से पार्टी इस राज्य में हाशिये पर चली गई है। बताया जा रहा है कि चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह को हटाकर दलित कार्ड खेलते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाना व कम समय मिलने से पार्टी को नुकसान हुआ है।
   इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल,कैप्टन अमरेंद्र सिंह,चरणजीत सिंह चन्नी,सुखबीर बादल के अलावा नवजोत सिंह सिद्धू,राजेंद्र कौर भठ्ठल जैसे दिग्गज नेता 17 वीं विधानसभा का मुंह देखने से वंचित रह गए।
इन नेताओं के हासिये पर चले जाने से हरियाणा व राजस्थान के विभिन्न दलों के नेताओं में चिंता पैदा हो गई है वहीं इन राज्यों मेेंं आप से जुड़े नेता व कार्यकर्ता फूले नहीं समा रहे। हरियाणा व राजस्थान में आज आप से जुड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं ने खूब जश्न मनाया है। पंजाब के संभावित चुनाव परिणाम के मद्देनजर इन दोनों राज्यों के अन्य दलों के नेता आप का दामन थामने को आतुर हैं।

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