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पंजाब में ‘आप’ को रोकने के लिए डेरा बना ‘शस्त्र’

Dera made 'shastra' to stop 'AAP' in Punjab

राजेंद्र कुमार
सिरसा,20 फरवरी। छिटपुट घटनाओं को छोड़कर आज पंजाब में चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। मतदान के बाद मिले प्राथमिक रूझानों पर विश्वास किया जाए तो मुख्य मुकाबला आप,कांग्रेस व अकाली दल (बादल )प्रत्याशियों के बीच ही रहा। राजनीति के जानकारों की मानी जाये तो आम आदमी पार्टी के प्रभाव को दिल्ली से बाहर रोकने के लिए डेरा सच्चा सौदा से जुड़े वोटों को एक शस्त्र के तौर पर उपयोग करने में भाजपा कामयाब रही। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहिम सिंह को पिछली 7 फरवरी को मिली फरलो के बाद से ही डेरा पर भाजपा का साथ देने के आरोप लग रहे थे।

किसान आदोंलन के चलते अकाली दल (बादल) के किनारा कर लेने से पंजाब में भाजपा अलग-थलग सी पड़ गई थी। अकाली दल बादल ने भाजपा की जगह बसपा से हाथ मिलाकर वोटों की भरपाई करने का प्रयास किया। किसानों की केंद्र सरकार से रूसवाई के चलते भाजपा की स्थिति पंजाब में कोई ज्यादा बेहतर नहीं थी। भाजपा ने अकाली दल बादल के दूर होने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह से जुगलबंदी की मगर वह ज्यादा सीरे चढ़ती नजर नहीं आ रही,क्योंकि कांग्रेस से अलग होने के बाद कैप्टन अमरेंद्र सिंह भी अपनी पैंठ को बरकरार नहीं रख पाए।

पंजाब में अकाली दल (बादल) व कांग्रेस की परंपरागत राजनीतिक जुगलबंदी को खत्म करने के लिए आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2017 के चुनावों में कदम रखा लेकिन सत्तारूढ़ नहीं हो सकी ओर विपक्ष में बैठकर संतोष करना पड़ा। अबकी बार देश में सर्वाधिक दलित आबादी वाले पंजाब प्रदेश की जनता को आकृषित करने के लिए ‘आप’ ने 2022 के आम चुनाव में किसी दलित चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने का शगुफा छोड़ा मगर कांग्रेस ने कैप्टन अमरेंद्र सिंह की छुट्टी करते हुए एक दलित विधायक एवं मंत्री के सिर मुख्यमंत्री का ताज रखकर यह सब ठुस्स कर दिया।

एक राजा ओर रंक के बीच भेद को दूर करने के फार्मूले पर चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने 111 दिन के कार्यकाल में आम जन तक पहुंचने का प्रयास किया ओर उसका असर भी देखने को मिला। चन्नी के जरिये बसपा सुप्रीमों बाबू कांशी राम की जन्म स्थली वाले प्रदेश में बसपा का प्रभाव कम करने में भी कांग्रेस कामयाब होती नजर आ रही है। अगर यह फार्मूला काम करता है तो इसका सीधा नुकसान अकाली दल (बादल) प्रत्याशियों को होगा।

राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में तीसरे दल यानि आप के शासन को रोकने के लिए भाजपा के इशारे पर डेरा सच्चा सौदा ने पंजाब चुनाव में आप प्रत्याशियों को जीत से दूर करने के लिए कांटे की टक्कर वाले विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा व अकाली दल (बादल) के प्रत्याशियों को समर्थन दिया,यह बात दिगर है कि डेरा सच्चा सौदा ने इसका खुलकर ऐलान करने की बजाय भंगीदासों के सहारे अपना संदेश फैलाया। अब तक मिले रूझानों में अधिकतर सीटोंं पर आप उम्मीदवारों की अकाली दल (बादल)या फिर कांग्रेस प्रत्याशियों से ही टक्कर रही है।

जब इस संदर्भ में डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक विंग के चैयरमेन राम सिंह से पूछा गया तो बताया कि जो कुछ होना था हो गया,जो हुआ सबको पता है। जब उनसे इसी फार्मले को उत्तर प्रदेश में अपनाए जाने बारे पूछा तो हंसकर बोले की देखते हैं क्या रहता है।

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