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ग्राउंड रिपोर्ट: ऐलनाबाद उप चुनाव: देखिए कौन पड़ रहा है किस पर भारी

1. एक बात जो अभय चौटाला के खिलाफ है वह यह कि चौधरी देवीलाल परिवार का कोई भी राजनैतिक वारिस (उनके पिता श्री ओमप्रकाश चौटाला को छोड़कर ) उनके साथ नहीं है l
2. अजय सिंह चौटाला और उनके दोनों पुत्र दुष्यंत व् दिग्विजय सरकार में हिस्सेदार हैं
रणजीत सिंह भी कहते हैं “परिवार अलग बात है और राजनीती अलग” इसलिए उनका समर्थन पूरी तरह से बीजेपी उम्मीदवार गोविन्द कांडा को है l
3. आदित्य चौटाला तो विधिवत बीजेपी में पदाधिकारी हैं और पूरे समर्पण के साथ बीजेपी उम्मीदवार गोपाल कांडा के साथ प्रचार में जुटा है l 
4. स्व. चौधरी देवीलाल का परिवार आज बीजेपी उम्मीदवार गोविन्द कांडा के साथ खड़ा है l
5. मान लें किसान आंदोलन के चलते इन सब का जनाधार कम हुआ होगा पर समुद्र सूखता है तो भी “गोडै गारय” जरूर मिलेगी l

ऐलनाबाद विधान सभा उपचुनाव में मात्र 10 दिन शेष रह गए हैं l तमाम राजनैतिक दलों ने अपनी ताकत इस चुनाव को जीतने के लिए झोंक दी है l इनेलो और कांग्रेस के प्रत्याशी इस चुनाव में किसानों के हमदर्दी का वोट पाने के भरपूर प्रयासों में हैं वहीँ बीजेपी के प्रत्याशी गोविन्द कांडा पंचायती उम्मीदवार की तरह ऐलनाबाद के विकास को अपना टारगेट बना उपचुनाव में जीत कर विधान सभा पहुँचने की कौशिश में लगे हैं l राजनैतिक हलकों में कमजोर उम्मीदवार समझे जाने वाले बीजेपी उम्मीदवार गोविन्द कांडा का चुनावी ग्राफ तेज़ी से बढ़ रहा है l राजनैतिक पंडित मानते हैं कि मुख्य मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी गोविन्द कांडा व् इनेलो के अभय सिंह चौटाला के बीच ही है l कांग्रेस यहाँ जितने भी वोट लेगी वे सीधे सीधे बीजेपी उम्मीदवार को मजबूत करने वाले साबित होंगे l

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बतादें कि किसानों की सहानुभूति हासिल करने के लिए विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद उपचुनाव के जरिए एक बार फिर से विधानसभा पहुँचने के लिए बेताब इनेलो प्रत्याशी अभयसिंह चौटाला के लिए यह चुनाव उतना आसान नहीं जितना त्यागपत्र देते वक्त उन्हें दिख रहा था l

दरअसल उनका त्यागपत्र ही उनके विधान सभा में पुन: प्रवेश के रास्ते की बड़ी बाधा बन सकती है l अभय सिंह चौटाला ने विधान सभा से त्यागपत्र देते वक्त कहा था कि वे विधान सभा में तभी प्रवेश करेंगे जब तीनों काले कृषि कानून वापस हो जायेंगे l उनके इसी कथन को मतदाताओं के सामने यह कहा कर कि अभी चौटाला जीते तो अपनी बात को पूरी करने के लिए फिर त्यागपत्र दे सकते हैं ! मिडिया में इस तरह की खबरें प्रसारित भी हो रही हैं l

कभी इस कदर एक होते थे … आज एक दूसरे के विरोधी

 

एक और बात जो अभय चौटाला के खिलाफ है वह यह कि चौधरी देवीलाल परिवार का कोई भी राजनैतिक वारिस (उनके पिता श्री ओमप्रकाश चौटाला को छोड़कर ) उनके साथ नहीं है l कभी उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर साथ खड़े होने वाले उनके बड़े भाई अजय सिंह चौटाला और उनके दोनों पुत्र दुष्यंत व् दिग्विजय सरकार में हिस्सेदार हैं l मान लें किसान आंदोलन के चलते उनका जनाधार कम हुआ होगा पर समुद्र सूखता है तो भी “गोडै गारय” जरूर मिलेगी l यानि कि कुछ जनाधार तो जरूर होगा उनका ऐलनाबाद में ! इसी तरह प्रदेश सरकार में बिजली मंत्री और कभी देवीलाल की विरासत के उत्तराधिकारी के रूप में रहे चौधरी रणजीत सिंह भी कहते हैं “परिवार अलग बात है और राजनीती अलग” इसलिए उनका समर्थन पूरी तरह से बीजेपी उम्मीदवार गोविन्द कांडा की तरफ है l

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एक अन्य सख्शियत आदित्य चौटाला तो विधिवत बीजेपी में पदाधिकारी हैं और पूरे समर्पण के साथ बीजेपी उम्मीदवार गोपाल कांडा के साथ प्रचार में जुटे हैं l कहा जा सकता है कि ओमप्रकाश चौटाला और अभय सिंह चौटाला को छोड़ दें तो स्व. चौधरी देवीलाल का परिवार आज बीजेपी उम्मीदवार गोविन्द कांडा के साथ खड़ा है l यही कारण है कि अभय चौटाला को कांग्रेस प्रत्याशी पवन बेनीवाल से से इतना खतरा नजर नहीं आ रहा, जितना गठबंधन प्रत्याशी गोविंद कांडा और उनके भाई गोपाल कांडा से दिखाई दे रहा है। अभय चौटाला द्वारा चुनावी सभाओं में मंदिर और धार्मिकता का जिक्र साफ जाहिर कर रहा है कि गोविन्द कांडा का सामाजिक और धार्मिक रुतबा इस चुनाव को प्रभावित जरूर कर रहा है l भाजपा ने भी कांडा बंधुओं के पर्सनल वोट बैंक को ध्यान में रखकर ही गोविंद कांडा पर अपना दांव खेला है।

 

बीजेपी का राजनैतिक जोड़ घटा का सार और आशा की किरण
कांडा बंधुओं की समाज सेवा व सिरसा में सामाजिक रुतबा बीजेपी के लिए फायदे का सौदा बन सकता है l दुष्यंत चौटाला और उनके भाई दिग्गविजय चौटाला के साथ चौधरी रणजीत सिंह व आदित्य चौटाला किसान आंदोलन के बीच विरोध के चलते अभय को गलत साबित करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। तीनो भाईयों को चाचा की हार में ही अपनी जीत नजर आ रही है वहीं रणजीत सिंह भी अपने भतीजे अभय चौटाला को हराने के लिए कोई कौर कसर नहीं छोड़ रहे । जाटलैंड में अपना वोट बैंक मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस की तमाम एक्सरसाइज से इस सीट पर जितने भी वोट कांग्रेस लेने में कामयाब होगी, उसका उतना ही नुकसान अभय चौटाला को होने की आशंका राजनैतिक हलकों में जताई जा रही है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी चाहती है कि कांग्रेस प्रत्याशी अच्छी खासी वोट काटने में सक्षम हुआ तो गोविन्द कांडा की राह आसान हो सकती है l

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अभी चुनाव में 10 दिन शेष है और राजनैतिक गहमा गहमी अपने चरम पर है l अभी से चुनावी समीकरणों के बारे में कोई घोषणा करना न्यायोचित नहीं होगी पर कुल जमा घटा जोड़ यह है कि कांग्रेस ने भरत सिंह बेनीवाल का टिकट काट कर पवन बेनीवाल पर (जो बीजेपी से आये हैं ) जो भरोसा जताया है उस से उसको नुक्सान हो रहा है l यदि पवन बेनीवाल उतने भी वोट ले गए जितने उन्होंने 2019 के चुनाव में लिए थे तो यह सीधा सीधा अभय चौटाला के लिए भारी चिंता का विषय है l और बीजेपी जेजेपी उम्मीदवार गोविन्द कांडा के लिए बढ़त का कारण बन सकता है l

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