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फ़र्ज़ी डिग्री फ़र्ज़ी अस्पताल- अवैध गर्भपात के लिए छापामारी, अस्पताल ही निकला अवैध-

छह साल पहले मर चुके डॉक्टर के नाम पर चल रहा है अस्पताल-संचालिका की डिग्री निकली फ़र्ज़ी

  • राजकुमार खुराना, तरावड़ी
तरावड़ी केसरीनंदन अस्तपाल में पुलिस की शिकायत पर गर्भपात मामले की जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम को गर्भपात के लिए उपयोग होने वाली किट आदि तो नही मिली, लेकिन यह अस्पताल पूरी तरह फर्जी डिग्रियों के आधार पर चल रहा है इसकी परतें जरूर जांच के दौरान एक के बाद एक खुलती चली गई। सुबह 11 बजें से शाम 6 बजें तक चली कार्रवाही के बाद जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ दस्तावेज साथ ले गई तो पुलिस स्वास्थ्य विभाग द्वारा सील किए गए औचार व दवाईयों के साथ अस्पताल की संचालक व उसके सहयोगी को साथ लेकर गई।
शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजें डिप्टी सीएमओ शीनू चौधरी व नीलोखेड़ी सिविल अस्पताल की एस.एम.ओ डा.अन्नू के नेतृत्व में एक टीम तरावड़ी के सौकड़ा रोड स्थित केसरीनंदन अस्पताल में गर्भपात के मामले में जांच करने पहुंची। जानकारी मिली है कि कुछ दिन पहले करनाल की रहने वाली एक महिला अस्पताल में आई और दवाईयां देकर उसका गर्भपात किया गया। गर्भपात करवाने वाली महिला अब यह शिकायत करनाल पुलिस को दी थी।
महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने इसकी जांच करने के लिए करनाल के सी.एम.ओं को लिखा था। इस मामले में जांच के लिए सीएमओ ने इस टीम का गठन किया गया था। जांच करने पहुंची टीम ने अस्पताल की डा. आशा चौधरी से आज जैसे ही सवाल किए तो वह उनमें उलझती नजर आई। इसके बाद सबसे चौकाने वाली बात सामने आई कि जिस डाक्टर जसमेंर के नाम पर यह अस्पताल चलाया जा रहा था उस डा. का देहांत करीब छह साल पहले हो चुका है जबकि अस्पताल में आज तक भी उनके नाम की मोहर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इसके बाद जब टीम ने अस्पताल की संचालिका आशा से उनकी डिग्री के बारे मे पुछा तो उन्होंने उनके सामने बी.ए.एम.एस की जो डिग्री दखाई जब उस डिग्री की जांच की गई तो वह भी फर्जी मिली। इसके बाद तो जांच टीम ने अस्पताल की सभी दवाईयों व रिकार्ड की जांच गहराई से शुरू की। अस्पताल के संचालन में पूरी तरह गोलमाल पाया गया। इसके बाद जांच टीम ने अस्पताल में रखी काफी दवाईयों व डा. के काम में उपयुक्त होने वाले औजारों को सील करके पुलिस को सौप दिया और पुलिस भी अस्पताल संचालक आशा व उसके सहयोग अमित को साथ ले गई।
इस बारे में करनाल की डिप्टी सी.एम.ओ. डा शीनू ने बताया कि एक महिला के गर्भपात के मामले में सीएमओ ने जांच टीम गठन किया था जिसका नेतृत्व वह कर रही है। टीम ने जांच में पाया कि जिस डा. जसमेर के नाम से अस्पताल चल रहा है उनका छह साल पहले देहांत हो चुका है और अस्पताल चलाने वाली आशा की डिग्री भी फर्जी पाई गई है। इसके बाद की कार्रवाही पुलिस की है। 

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