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सरकार कर रही है जमानत के नाम पर किसानों को गुमराह: भारूखेड़ा

किसानों की जमानत किसी किसान नेता ने नहीं करवाई बल्कि सरकार ने अपने स्तर पर ही इन किसानों की जमानत करवाकर उन्हें रिहा किया है

राजेन्द्र कुमार
सिरसा,26 जुलाई। सिरसा में हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर की गाड़ी पर बीती 11जुलाई को हमला करने के आरोप में हिरासत में लिए गए पांच किसानों की जमानत किसी किसान नेता ने नहीं करवाई बल्कि सरकार ने अपने स्तर पर ही इन किसानों की जमानत करवाकर उन्हें रिहा किया है। इस मामले को लेकर किसानों में जो मतभेद फैलाया जा रहा है, वो सरकार की ही चाल है।

उक्त बातें हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने स्थानीय जाट धर्मशाला में पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए कही। भारूखेड़ा ने कहा कि जमानत के मामले को लेकर सरकार द्वारा किसानों में मतभेद पैदा किया जा रहा है, ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। लेकिन देश का अन्नदाता सरकार की राजनीति को पूरी तरह समझ चुका है और उसकी बातों में नहीं आने वाला है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अनशन से पूर्व किसानों से हिरासत में लिए गए किसानों पर देशद्रोह की धाराएं होने की बात कहकर जमानत से मना कर दिया था, लेकिन किसानों की एकता और बलदेव सिंह के अनशन ने सरकार को किसानों को रिहा करने पर मजबूर कर दिया और किसानों के संघर्ष की आखिरकार जीत हुई।

सरकार किसानों के आंदोलन को तोडऩे के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रही है, लेकिन सरकार की सभी चालें उलटी पड़ रही हैं। सरकार बौखला गई है और उसे ये सूझ नहीं रहा है कि किसानों के आंदोलन को कैसे तोड़ा जाए। जब तक तीनों काले कानून रद्द नहीं होते, आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार किसानों पर चाहे कितने भी केस दर्ज कर दे, वे डरने वाले नहीं हैं। इस मौके पर किसान संघर्ष समिति के प्रदेश कन्वीनर मनदीप नथवान ने कहा कि केवल सरकार ही नहीं कुछ विपक्ष के लोग भी किसान आंदोलन को तोडऩा चाहते हैं। ये लोग पंूजीपतियों के दलाल हैं और ये कतई नहीं चाहते हैं कि तीनों कानून रद्द हों।

नथवान ने कहा कि ये लड़ाई बड़ी हो चुकी है। यहां अब सभी किसान जत्थेबंदियों, मजदूरों व आमजन को मिलकर मोर्चा संभालना है और तानाशाह हो चुकी सरकार को सबक सिखाना है। उन्होंने डिप्टी स्पीकर घटनाक्रम को लेकर कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा का शुरू से आह्वान रहा है कि शांतिपूर्वत तरीके से आंदोलन को चलाना है। किसानों को मोर्चा की तरफ से काले झंडे दिखाने की कॉल थी, लेकिन कुछ शरारती तत्वों ने मौके का फायदा उठाकर पत्थरबाजी की, जिसका आरोप किसानों पर लगा दिया गया। भविष्य में इस बात का खासतौर पर ध्यान रखा जाएगा कि ऐसे किसी कार्यक्रम में कोई शरारती तत्व शरारत न कर पाए।

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इस मौके पर लखविंद्र औलख ने कहा कि उनकी लड़ाई केंद्र सरकार से है। जब तक तीनों काले कानून रद्द नहीं हो जाते, वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार व उसके कुछ चापलूस नुमाइंदे अभी भी हिरासत में लिए गए किसानों के घर जाकर उन्हें डरा रहे हैं कि उन पर दर्ज केस रद्द नहीं हुए हैं, जोकि सरकार की साजिश है।

उन्होंने एडवोकेट जीपीएस किंगरा द्वारा किसानों में मतभेद की बातों को दरकिनार करते हुए कहा कि ये सरकारी लोग हैं, इनका किसानी से कोई लेना देना नहीं है। एक वकील होते हुए उन्हें ये तो ज्ञान होना चाहिए कि देशद्रोह के मामले में जमानत कैसे हो सकती है? बिना सरकार की मर्जी के किसान तो क्या कोई भी जमानत नहीं करवा सकता। इन लोगों का काम आंदोलनरत किसानों को गुमराह करना है, लेकिन किसान जागरूक हैं और इनकी बातों में नहीं आने वाला है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी किसान ने हिरासत में लिए गए किसानों की जमानत करवाई है तो किंगरा जांच करवा लें, या फिर हमें सबूत दें। सभी किसान जत्थेबंदियों के नेताओं ने आह्वान किया कि कोई भी किसान ऐसे लोगों के बहकावे में न आएं। इस मौके पर हरियाणा किसान एकता से गुरप्रेम, बीकेए लखविंद्र लखा, हरजिंद्र सिंह, कालांवाली से प्रधान बलवंत सिंह, वेद चामल, अनिल चामल, चंद सिंह औलख सहित अन्य उपस्थित थे।

 

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