हरियाणा

तहसील इंद्री के कम्प्यूटर ऑपरेटरों की मनमानी से आम जनता हुई तंग

इंद्री, 20जुलाई (शिव बतरा) हरियाणा के सभी तहसीलों में जंहा भ्र्ष्टाचार के आरोप लगते आये हैं, वंही आम जनता और सी.एस.सी. संचालकों को तंग करने का मामला सामने आया है। तहसील कार्यालय इंद्री में लगे कम्प्यूटर ऑपरेटरो से लोग खफा हो चुके है। कम्प्यूटर आपरेटरों की मनमानी को लेकर लोग कई बार विरोध कर चुके हैं। ऐसा ही एक मामला जाति प्रमाण पत्र और रिहायशी प्रमाण की वेरिफिकेशन करने मे सामने आया है। रिहायशी प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए गांव के नम्बरदार के हस्ताक्षर को लेकर तहसील कार्यालय में खूब बवाल मचा। पीड़ित द्वारा नम्बरदार के हस्ताक्षर न करवाकर सरपंच के हस्ताक्षर करवाये गए, उसके बाद पटवारी की रिपोर्ट करवाई गई। रिपोर्ट पर बकायदा तहसीलदार के हस्ताक्षर करवाये गए, लेकिन तहसील कार्यालय इंद्री में वेरिफिकेशन करने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर ने प्रमाण पत्रों को नम्बदार के हस्ताक्षर ना होने पर दो बार रिजेक्ट कर दिया। जब इस सम्बन्ध में तहसीलदार इंद्री से बात की तो उन्होंने छुट्टी पर होने की बात कहकर इस मामले में नायब तहसीलदार इंद्री से बात करने की बात कही। फिर जब इस मामले को लेकर नायब तहसीलदार को फोन किया गया तो उन्होंने फोन नही उठाया। इस मामले में कुछ सी.एस.सी. संचालको ने भी कहा कि उन्हें भी कई-कई बार प्रमाण पत्र अपडेट करने पड़ते है, जबकि उनमे कोई कमी भी नहीं होती। ऐसे ही फर्द (जमाबन्दी) निकलवाने वाले शिव कुमार, सतीश कुमार, बीर सिंह, नितिन व शुभम ने बताया कि तहसील कार्यालय में अंदर बैठे कम्प्यूटर ऑपरेटरों से कुछ लोग सिफारिश से काम करा लेते हैं और आम जनता बाहर गर्मी में अपने काम होने का इंतजार करती रहती है। बता दे कि जिस खिड़की से जमाबन्दी की नकल दी जाती है, वंहा आमजन के लिए किसी भी प्रकार की सुविधा का इंतज़ाम भी नही किया गया है। जनता की सुविधा के लिए बनाए गए शौचालयों का भी बुरा हाल है, सफाई को लेकर व्यवस्था दुरुस्त नही है, बहुत गंदगी फैली है।

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