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बीजेपी के गले की फांस बना नागरिकता संशोधन कानून (सीएए)

असम में बीजेपी सीएए को चुनावी मुद्दा ही नहीं मान रही, जबकि पश्चिम बंगाल में भाजपा सीएए को लेकर मुखर

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) दोधारी तलवार बन गया है l खासकर बीजेपी के लिए ! पश्चिम बंगाल में इस कानून (सीएए) को लेकर भाजपा मुखर है वहीँ असम में बीजेपी इसे चुनावी मुद्दा ही नहीं मान रही। जबकि असम में कांग्रेस सीएए के खिलाफ मुखर है और कह रही है कि अगर कांग्रेस ही सरकार बनती है तो नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू नहीं होने देगी l नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) संसद में सीएए पारित होने के करीब पंद्रह महीने बीत जाने के बाद भी केंद्र की सरकार इसके नियम भी अधिसूचित नही सकी है । जिस कारण ये कानून अभी तक लागू नहीं हो पाया है। बावजूद इसके राज्यों में इस मुद्दे पर अलग-अलग घमासान जारी है।

अब केंद्रीय स्तर पर रणनीति के बजाय इस मामले को राज्य स्तर पर केंद्रित किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि चुनाव के बाद परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सरकार इस मुद्दे पर कोई फैसला करेगी। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार की सीएए को लेकर कोई राय नहीं बदली है। लेकिन कोविड की वजह से मामला लगातार टलता चला गया। इसके अलावा सरकार इस मामले को लेकर नया फ्रंट नहीं खोलना चाहती। इसलिए नियमों में देरी हुई।

लेकिन यहां यह भी बात देखने लायक है कि जिस कोविड का हवाला देकर देरी की बात हो रही हैं उसी कोविड में फार्मर्स बिल पर ऑर्डिनेंस जारी हुआ और महामारी के दौरान ही भारी विरोध के बावजूद आनन् फानन में कानून पास भी करवा लिए l और तो और लागू भी कर दिए , जिस के विरोध में किसान 4 महीने से आंदोलित हैं और अपने खेत खलिहान छोड़ कर दिल्ली की सीमाओं पर बैठने को मजबूर हैं l

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राज्यों के चुनाव में पहले इस बात पर चर्चा हो रही थी कि शायद केंद्र सरकार नियमों को अधिसूचित कर देगी और चुनाव में ये बड़ा मुद्दा होगा। सत्ताधारी दल की ओर से इस संबंध में बयान भी आये थे। लेकिन सरकार ने जमीनी इनपुट के आधार पर अपनी रणनीति बदल दी। अब बंगाल में इसे भाजपा अपने पक्ष में मानती है, लेकिन असम में अलग जमीनी हकीकत को देखकर फिलहाल चुनाव प्रचार में इसे ठंडा रखा गया है।

उधर, असम में कांग्रेस ने गारंटी दी है कि वे सत्ता में आए तो सीएए नहीं लागू होने देंगे। भाजपा कांग्रेस पर कटाक्ष कर रही है कि वे ऐसा मुद्दा उठा रहे हैं जिसकी चर्चा ही नही है। अब सबकी निगाह असम में भाजपा के घोषणापत्र पर टिकी है कि पार्टी इस मुद्दे का जिक्र करती है या नहीं। जानकारों का कहना है कि सभी राज्यों के चुनाव अलग अलग मुद्दे पर लड़े जा रहे हैं। इसलिए राज्यवार रणनीति राजनीतिक दलों की मजबूरी है। सीएए का दांव बंगाल में भाजपा को और असम में कांग्रेस को कितना फायदा पहुंचाएगा अभी कहना मुश्किल है।

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