क्राइमराजनीती

राहत: प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व सीएम हुड्डा सहित 20 आरोपियों को मिली अंतरिम जमानत

Relief: 20 accused including former CM Hooda got interim bail in plot allocation case

पंचकूला। पंचकूला प्लॉट आवंटन घोटाला मामले में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित 20 आरोपी शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कोर्ट में पेश हुए। पेश होने के बाद सभी को पांच लाख के बेल बांड पर अंतरिम जमानत दे दी गई। वहीं दो आरोपियों को पेशी से छूट दी गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी। ईडी कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से पूछा है कि इसमें आरोपियों को रेगुलर बेल क्यों नहीं मिलनी चाहिए इसका जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई में इस मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय के वकील अपना जवाब दायर करेंगे।

पिछली सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने पंचकूला स्थित विशेष ईडी की कोर्ट में 22 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। ईडी ने पंचकूला औद्योगिक प्लॉट अलॉटमेंट स्कैम में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) के तहत यह चार्जशीट दाखिल की थी। दायर चार्जशीट के मुुताबिक हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिचितों को 30.34 करोड़ रुपये में 14 औद्योगिक भूखंडों को गलत तरीके से आवंटित किया था।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा और 21 अन्य के खिलाफ पंचकूला भूमि घोटाला मामले में आरोप पत्र दायर किया है। आरोप पत्र में चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शामिल हैं। ईडी ने हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा एक प्राथमिकी के आधार पर 2015 में जांच शुरू की थी। प्राथमिकी को बाद में 2016 में केंद्रीय जांच ब्यूरो ईडी को केस जांच के लिए ट्रांसफर किया गया था। ईडी की तरफ से इस मामले की जांच करने के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित चार आईएएस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत 120-बी, 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच में यह तथ्य आए हैं सामने

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जांच में पता चला है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के पदेन अध्यक्ष रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने गलत तरीके से भूखंडों का आवंटन किया था। चार सेवानिवृत्त अधिकारी धर्मपाल सिंह नागल (पूर्व मुख्य प्रशासक, हुडा), सुरजीत सिंह (पूर्व प्रशासक, हुडा), सुभाष चंद्र कंसल (हुडा के पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक) और नरेंद्र सिंह सोलंकी (हुडा के फरीदाबाद के पूर्व जोनल प्रशासक) हैं।

ईडी की जांच में पता चला कि भूखंडों को आवंटन के लिए निर्धारित मूल्य को सर्कल दर से पांच गुना और बाजार दर से सात से आठ गुना कम रखा गया था। सीबीआई ने जांच में पाया कि आवेदन की अंतिम तिथि के 18 दिन बाद आवंटन के लिए मापदंड बदल दिए गए थे। इसमें कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया है। जब प्लॉट अलॉट किए गए, उस दौरान पूर्व सीएम हुड्डा ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन थे। जिन्हें प्लाट अलाट हुए उनके करीबी थे। एचएसवीपी की पॉलिसी 2011 के तहत ये निर्धारित योग्यता पूरी नहीं कर पा रहे थे। हर प्लाट पर 15 से 35 फीसदी नुकसान सरकार को हुआ है।

 

इस मामले में यह हैं आरोपी
वकील एचपीएस वर्मा ने बताया कि इसमें मुख्य आरोपी पूर्व सीएम भपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा आईएएस अधिकारी धर्मपाल सिंह नागल, सुरजीत सिंह, सुभाष चंद्र कंसल, नरेंद्र सिंह सोलंकी हैं। वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा के भतीजे की पत्नी रेनू हुड्डा, नंदिता हुड्डा, मोना बेरी, प्रदीप कुमार, कंवरप्रीत सिंह संधू, डागर कत्याल, डॉ. गणेश दत्त, अमन गुप्ता, लेफ्टिनेंट कर्नल रिटायर्ड ओपी दहिया, मनजोत कौर, वाईपीटी एंटरटेनमेंट हाउस प्रा. लिमिटेड के सिद्घार्थ भारद्वाज, भारत भूषण तनेजा और अनुपम सूद को आरोपी बनाया गया है।

 

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