हरियाणा

संत शिरोमणि गुरू रविदास महाराज जी के 644वें जन्मोत्सव मनाया धूमधाम से

गुरू रविदास ने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ उठाई थी आवाज : तालु

भिवानी, 27 फरवरी : संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर शनिवार को संत शिरोमणि गुरू रविदास महाराज जी के 644वें जन्मोत्सव को गांव स्तर पर मनाया गया। इस दौरान जिला के विभिन्न गांवों में संत शिरोमणि गुरू रविदास महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनको याद किया गया। इसी के तहत जिला के गांव तालु में गुरू रविदास महाराज की जयंती मनाई। इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान नेता जोगेंद्र तालु ने कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु रविदास जी का जन्म माघ माह की पूर्णिमा तिथि को वर्ष 1398 में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन रविदास का जन्म हुआ था, उस दिन रविवार था। इसी के चलते इनका नाम रविदास पड़ा। गुरू रविदास जयंती को दुनियाभर के लाखों द्वारा बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसी के चलते किसानों ने भी गांव स्तर पर गुरू रविदास की जयंती मनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि गुरू रविदास भारत में 15वीं शताब्दी के एक महान संत, दर्शनशास्त्री, कवि, समाज-सुधारक और ईश्वर के अनुयायी थे। उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। छुआछूत आदि का उन्होंने विरोध किया और पूरे जीवन इन कुरीतियों के खिलाफ ही काम करते रहे। गुरु रविदास जी भक्ति आंदोलन के अगुवाई माने जाते हैं, जिन्होंने भारतवर्ष में व्याप्त जाति प्रथा की कुरीतियों के खिलाफ, क्रांतिकारी स्वर बुलंद किया और अपनी पवित्र वाणी के माध्यम से समाज में समता और बराबरी का संदेश दिया। गुरु रविदास जी मानवीय एकता के प्रबल समर्थक एवं जातिगत भेदभाव के प्रबल विरोधी थे। गुरु रविदास ईश्वरीय शक्ति में पूर्ण यकीन और विश्वास रखते थें। उनकी वाणियों में उनके विचार स्पष्ट रुप से कहते हैं कि इस धरती पर जन्मा कोई भी व्यक्ति अपनी जाति या जन्म की वजह से नहीं अपने कर्म के कारण ही ऊंचा या नीचा होता। इस मौके पर उनके साथ सुखबीर, रतन सिंह, पवन सिंह, धूप सिंह, असीन, बीजू, सोनू, दानाराम, रमेश, दलबीर सहित अनेक किसान मौजूद रहे।

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