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सात साल पहले मासूम का अपहरण और फिर रेप के बाद हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई

यूपी के हरदोई जिले की कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव कन्था थोक मजरा बहर में सात साल पहले मासूम का अपहरण और फिर रेप के बाद हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रविजय श्रीनेत के फैसले पर पीड़ित परिवार ने कहा, उनको न्याय मिला। बहर निवासी गुड्डू उर्फ बब्बू कहार 17 मार्च 2014 की रात करीब 8 बजे घर के बाहर खेल रही डेढ़ साल की बच्ची को उठा ले गया था। गांव के बाहर ले जाकर उसने बच्ची से दुष्कर्म करने के बाद गला दबाकर हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए शव गांव के बाहर तालाब में फेंक दिया था।

परिवार ने बच्ची की तलाश की तो दूसरे बच्चों ने बताया कि गुड्डू उसे उठाकर ले गया है। तलाशी के दौरान दूसरे दिन मासूम का शव मिलने पर एफआईआर दर्ज कराई गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटें मिलीं। शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह ने बताया कि अदालत के समक्ष पेश मासूम के पिता की गवाही के अलावा गांव के और लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपित पर अपहरण, रेप और हत्या का जुर्म सही पाया। इसे विरलतम अपराध की श्रेणी करार देते हुए अदालत ने आरोपित गुड्डू उर्फ बब्बू कहार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपित पर एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।

जैसे बेटी को मारा वैसे ही आरोपित को मार दिया जाए
हैवानियत का शिकार हुई बच्ची अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। उसकी मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मामले की विवेचना उप निरीक्षक बृजेश कुमार ने की। छोटे भाई ने बताया कि वह बड़े भाई के यहां होली मिलने उसके घर जा रहा था। जब उसके घर के सामने पहुंचा तब देखा कि आरोपित अधेड़ बच्ची को गोद में लेकर जा रहा था। उसे टोका तो उसने बताया कि बिस्कुट खिलाने जा रहा है। अभी घुमाकर ले आएगा। 10 मिनट बाद वापस न आने पर बच्ची की तलाश शुरू की गई पर बच्ची व आरोपित का कोई पता नहीं चल सका। गांव के कालिका ने बताया कि तिराहे पर गुड्डू को बच्ची को गोद में ले जाते देखा था। बाद में बच्ची का शव गांव के बाहर शिव सिंह के तालाब में पड़ी मिली थी।

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नाक-मुंह दबाने के कारण दम घुटने से हुई मौत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतका के नाखून, जीभ व ओंठ नीले पाए गए। नाजुक अंग पर भी गंभीर चोटें थीं। नाक, मुंह दबाने के कारण दम घुटने से उसकी मृत्यु हुई थी।

खोजबीन कराने के दौरान भाग निकला था आरोपित
घटना वाली रात में लगभग एक बजे आरोपित गांव में ही होली जलने वाले स्थान पर ग्रामीणों को मिला था। तब ग्रामीणों ने उससे बच्ची के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसने उसे घर के बाहर छोड़ दिया था। इस पर लोगों ने पकड़कर उसे पीटा। उसकी अस्पताल जाकर दवाई कराई। फिर गांव वालों के साथ में आरोपित भी बच्ची को ढूंढने निकला। सभी के साथ कुछ देर तक वह खोजबीन कराता रहा लेकिन बाद में अंधेरे में मौका पाकर वह भाग निकला।

इन धाराओं में दर्ज हुआ था केस
धारा 364, 302, 201, 376 ए, भारतीय दण्ड संहिता धारा 5 (एम)/6 पास्को अधिनियम।

शराब पीकर गांव में आवारा घूमता था गुड्डू
आरोपित अधेड़ तीन भाई था। इनमें वह अविवाहित था। गंदी नीयत का था। इसीलिए उसके भाइयों ने उसे निकाल दिया था। वह घर के बाहर रहता था। गांव में उसे कोई अच्छे चरित्र का नहीं मानता है। उसके परिवार से कोई पैरवी के लिए नहीं आया। पुलिस को दिए बयान में ग्रामीणों ने भी बताया कि गुड्डू शराब पीकर आवारा घूमता रहता था। उसे सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता की सेवाएं प्रदान की गईं।
उम्र को लेकर भी कई बातें सामने आईं
अभियुक्त गुड्डू ने अदालत में दिए बयान में अपनी उम्र 60 वर्ष बताई। जबकि वादी ने उसकी उम्र 40 से 45 साल बताई। हालांकि उसकी उम्र के बारे में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि देखने में उसकी उम्र 50 से 55 वर्ष प्रतीत होती है। 
 

 

इससे पहले दो मामलों में हुई थी मृत्युदंड की सजा
कानून की नजर में मृत्युदंड की सजा विरलतम अपराध की श्रेणी में आती है। इसके पूर्व करीब 10 वर्ष पूर्व हत्या के मामले में ही थाना अतरौली क्षेत्र निवासी कुनहा को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। जबकि करीब 20 वर्ष पूर्व थाना सुरसा क्षेत्र के उदरा नेवलिया गांव में हुए भीषण नरसंहार कांड में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी।

और जज ने तोड़ दिया पेन
अबोध बालिका के रेप और मर्डर कांड में मृत्यु दंड की सजा सुनाने के साथ ही अपर सत्र न्यायाधीश चंद्र विजय श्रीनेत काफी सीरियस हो गए। उन्होंने फैसले पर हस्ताक्षर करने के साथ ही पेन को वहीं तोड़ दिया। वहीं शासकीय अधिवक्ता चंदन सिंह भी काफी गंभीर हो गए। उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।

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