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…ताकि बलिदान व्यर्थ ना जाये, सुसाइड नॉट लिख कर फंदे पर झूले बुजुर्ग किसान कश्मीर सिंह

कृषि बिलों के खिलाफ यूपी गेट पर चल रहे धरने में शामिल बिलासपुर के बुजुर्ग किसान कश्मीर सिंह की आत्महत्या की खबर से परिवार में कोहराम मच गया तो पूरा गांव इसे लेकर सकते में हैं। परिवार ने इस मौत के लिए केंद्र सरकार को जमकर कोसा है तो गांव वालों में रोष है। स्थिति की नजाकत को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। कई प्रशासनिक और पुलिस अफसरों ने गांव में परिजनों से मुलाकात की।

बतादें कि कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसानों के आंदोलन में रामपुर के किसान बाबा कश्मीर सिंह ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। आत्महत्या करने से पहले गुरुमुखी में लिखे गए अपने सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी आत्महत्या का जिम्मेदार सरकार को बताया । लिखा कि आखिर हम कब तक यहां सर्दी में बैठे रहेंगे। ये सरकार सुन नहीं रही है और इसलिए अपनी जान देकर जा रहा हूं ताकि कोई हल निकल सके।

कृषि कानून के खिलाफ कड़ाके की ठंड के बावजूद बिलासपुर के सैकड़ों किसान दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। इनमें पसियापुरा गांव निवासी 70 वर्षीय कश्मीर सिंह भी हैं। वह करीब बीस दिन पहले यहां से गए आंदोलित किसानों के जत्थे के साथ गए थे। तबसे वह वहीं धरने में शामिल थे। परिजनों के अनुसार शनिवार सुबह कश्मीर सिंह ने मोबाइल शौचालय के बाथरूम में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। शव के पास से गुरुमुखी में लिखा हुआ उनका सुसाइड नोट भी पुलिस को मिला है। उनकी आत्महत्या से न केवल धरने में शामिल किसानों बल्कि बिलासपुर के किसानों में भी रोष है। परिवार इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार बता रहा है। कश्मीर सिंह की पत्नी बलवीर कौर ने बताया उनके तीन बेटे और एक बेटी है।

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आत्महत्या की खबर पर गांव दौड़े अफसर

बिलासपुर। कश्मीर सिंह की आत्महत्या की खबर से स्थानीय प्रशासन भी सकते में आ गया। किसी अनहोनी की आशंका में तड़के ही एसडीएम डॉ. राजेश कुमार, सीओ सतीश कुमार व प्रभारी निरीक्षक ब्रजेश कुमार यादव भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंच गए। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों सहित ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें समझाया-बुझाया। नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने केंद्र सरकार व स्थानीय प्रशासन पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। दोपहर को अपर जिलाधिकारी जेपी गुप्ता, अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह भी गांव पहुंचे और मृतक के पुत्र लखविन्द्र सिंह लाडी से बात की।

गुरुद्वारे के सेवादार थे कश्मीर, उनके नाम है साढ़े तीन एकड़ जमीन

बिलासपुर। मृतक के पुत्र लखविन्द्र सिंह लाडी ने बताया कि पिछले करीब दो दशक से चमोली में हेमकुंड साहिब स्थित पीली कोठी गुरुद्वारा सुख सागर में बतौर सेवादार काम कर रहे थे। ठंड में 10 अक्टूबर को गुरुद्वारा परिसर के कपाट बंद होने पर वह वापस अपने घर पसियापुरा गांव आ गए थे। यहां से वह पहले 25 नवंबर को इलाके के किसानों के साथ धरना देने दिल्ली गए थे लेकिन एक सप्ताह रुककर घर लौट आए थे। दोबारा किसानों का जत्था जाने लगा तो करीब 20 दिन पहले वह फिर धरने में शामिल होने चले गए थे। शनिवार सुबह उनकी मौत की खबर आई। कश्मीर सिंह की पत्नी बलवीर कौर ने बताया कश्मीर सिंह अपने भतीजे यशपाल सिंह के साथ दिल्ली में धरने में शामिल हुए थे। उनके नाम करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन है।

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