Breaking Newsराजनीतीशिक्षाहरियाणा

फीस पर 18 प्रतिशत GST थोपने के निर्णय का विरोध करेगा छात्र संगठन एसएफआई

Student organization SFI will oppose the decision to impose 18% GST on fees

एसएफआई की राज्य कमेटी की मीटिंग सम्पन्न !

कैथल : स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) हरियाणा राज्य कमेटी की मीटिंग राज्य अध्यक्ष विनोद गिल की अध्यक्षता में शहीद भगत सिंह भवन कैथल में सम्पन्न हुई। एसएफआई हरियाणा राज्य कमेटी ने सरकार द्वारा नए सत्र से सरकारी महाविद्यालयों से विश्वविद्यालय को दी जाने वाली एफिलेशन, इंस्पेक्शन व कॉन्टिनुशन फीस पर 18% GST थोपने के निर्णय का विरोध किया है।

एसएफआई के राज्य अध्यक्ष विनोद गिल व राज्य सचिव सुरेन्द्र सिंह ने सयुंक्त प्रैस बयान जारी करते हुए बताया कि एसएफआई का मानना है कि पहले इस फीस पर किसी भी तरीके का कर नही होता था उसके पीछे वजह थी कि छात्र संगठन GST के आते ही शिक्षा को GST मुक्त करने की मांग कर रहे थे। लेकिन इस बार सरकार कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए आर्थिक संकट का बहाना लगाकर शिक्षा को अप्रत्यक्ष रूप से GST के दायरे में लाने के लिए आगे आई है।

जिसका असर महाविद्यालयों में बेतहाशा फीस वृद्धि के रूप में देखने को मिलेगा, औऱ हजारों छात्र आर्थिक तंगी के कारण लगातार महंगी हो रही उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे ।हालांकि जब हम GST की बात करे तो मादक पदार्थों डीज़ल पेट्रोल व अन्य गैर जरूरी वस्तुओ तथा सेवाओ पर GST की दर शून्य या नाममात्र रखी गई है । लेकिन शिक्षा जो राज्य की अनिवार्य जिम्मेवारी है उसे 18% GST के दायरे में रखना सरकार के शिक्षा विरोधी नजरिये को बेनकाब करता है।

देश मे समय समय पर गठित विभिन्न शिक्षा आयोगों व सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा भी शिक्षा को मानवीय विकास व राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण पहलू मानते हुए शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च को बढ़ाने की बात की है लेकिन हमारी सरकार शिक्षा को लगातार महंगा करने पर तुली हुई है। जिसका नतीजा हम सरकारी शिक्षण संस्थानों की कंगाली के रूप में देख रहे है। प्रदेश सरकार भी इस बात को जानती है कि अभी सभी शिक्षण संस्थान बन्द है और कोरोना महामारी के चलते सभी छात्र भी अपने घरों में है, ऐसे में छात्रो के द्वारा किसी विरोध की कोई गुंजाइश नही है, इसलिए सरकार गुपचुप तरीके से इस फैसले को लागू करना चाहती है।

एसएफआई के हरियाणा राज्य अध्यक्ष विनोद गिल ने बताया कि हम पिछले 8 महीने से कोरोना संकट के कारण पैदा हुई समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार से मांग कर रहे है कि नए शैक्षिणिक सत्र के शुरू होने से पहले सभी शिक्षण संस्थानों में छात्रों व कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं जिसके लिए सेनेटाइजर टर्नल का निर्माण करना जरूरी है क्योंकि इनमें अधिक लागत भी नही है तो सरकार आर्थिक तंगी का बहाना भी नही बना सकती है।

यह भी पढ़े   छुट्टी के दिन भी बिजली का बिल भर सकेंगे उपभोक्ता

इसके साथ ही कोरोना महामारी के चलते पैदा हुए आर्थिक संकट ने प्रदेश के कामगारों, किसानो,बागवानों व छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी है इस लिए एसएफआई सरकार से मांग कर रही है कि सभी छात्रों को विशेष भत्ता दिया जाए व उनके 3 महीने के कमरों के किराए ,होस्टल व पी जी के किराए माफ किए जाए। लेकिन सरकार इसके विपरीत इस महामारी को अवसर के रूप में इस्तेमाल करते हुए शिक्षा को 18% GST के दायरे में लाकर फीस बढ़ोतरी करते हुए आम छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का काम कर रही है। जिसे हरगिज बर्दाश्त नही किया जाएगा। और एसएफआई सरकार के इस शिक्षा विरोधी फैसले के खिलाफ 23 नम्वबर को प्रदेश भर के महाविद्यालय विश्वविद्यालय से हरियाणा को ज्ञापन भेजेगे। 26 व 27 नम्वबर को इन माँगों जिला स्तरीय प्रदर्शन करेंगे।

ये हैं मुख्य मांगें
1. शिक्षा में 18% GST की शर्त शीघ्र हटाई जाए।
2. सभी स्कूल महाविद्यालय, विश्वविद्यालय पूर्ण रुप से खोले जाए।
3. सभी शिक्षण संस्थानों में सेनेटाइजर टनल का निर्माण करो।
4. सभी तरह की छात्रवृत्ति शीघ्र बहाल करो।
5. सरकार सभी छात्रों के तीन महीनों की फीस माफ करें। व छात्रों के तीन माह के होस्टल चार्जेज,कमरों के किराए सरकार अदा करे।
6. ऑनलाइन शिक्षण पद्धति को दुरुस्त करो।
7. सभी छात्रों को राहत के रूप में विशेष भत्ता दिया जाए।
8. MBBS कि फीस बढोत्तरी को वापस लिया जाए।
9. इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते बिगड़ती पारिवारिक आर्थिक स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों का प्रवेश शुल्क माफ किया जाए।
इस दौरान मंजीत सिंह, गोलू बात्ता, सोम्या, ज्योति, पूनम, मनीष, दीपक, अक्षय, पवन, प्रवीन आदि उपस्थित रहे।

Back to top button
x

COVID-19

India
Confirmed: 9,534,964Deaths: 138,648
Close
Close