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बेरोजगारों को जाल में फंसा बना देता था साइबर अपराधी , जानिए अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधी राहुल कैसे फंसा पुलिस के जाल में !

The cyber criminal used to make the unemployed trapped in the Network, know how international cyber criminal Rahul got trapped in the police trap!

बेरोजगार युवकों को अपने साथ जोड़ कर राहुल इन्हें साइबर क्राइम की ट्रेनिंग देता था , फिर उनके कागजातों के आधार पर देश के विभिन्न स्थानों पर बैंकों में खाते खुलवाता, इन खातों की डिटेल को अपने पास रखकर इनका इस्तेमाल बाद में ट्रांजेक्शन के लिए करता था l राहुल के गिरोह में शामिल युवाओं की उम्र लगभग 20 से 28 के बीच होती थी l

 

साथ ही मामले की जांच कर रही पुलिस को पता चला है कि राहुल की बैंक कर्मचारियों के साथ सांठगांठ थी जिसका सहारा लेकर वो अपराध को अंजाम देता था. बैंक कर्मचारियों को इसके लिए कमीशन भी दिया जाता था जो की पैसों का स्थानांतरण करते थे. साइबर ठगी में अलग- अलग बैंक अकांउट का इस्तेमाल किया जाता, जिसकी सहायता से पुलिस जांच से बचा जाता था

पुलिस जांच से बचने के लिए राहुल के पास 6 खाते थे जिनका इस्तेमाल बड़े शातिराना ढंग से करता था. जांच के दौरान इन खातों में से कुछ में तो जीरो बैलेंस था जबकि कुछ में लाख रुपये तक पड़े हुए थे. पुलिस को यह भी पता चला कि राहुल ने पश्चिम बंगाल के वर्द्धमान में नकली सामान को पैक करने के लिए कुछ लड़कों को रखा था, जो उसके ई कामर्स से सामान बुक करने वाले ग्राहकों को सामान भेजते थे.

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