हरियाणा

आल इंडिया किसान खेत मजदुर संगठन पीसी

ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड सत्यवान ने की प्रैस कांफ्रेंस। रेवाड़ी के निजी रेस्टोरेंट में पीसी कर दो नवम्बर को झज्जर में होने वाले किसानों के विरोध प्रदर्शन का दिया निमंत्रण। तीनो कृषि बिलो को बताया किसान विरोधी और पूंजीपतियों को फायदा पहुँचाने वाला।

 केंद्र सरकार के तीन काले कृषि कानून और बिजली बिल के खिलाफ ऑल इंडिया किसान संघर्ष तालमेल कमेटी का देशभर के किसानों व खेत मजदूरों को 26-27 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान है। इसे सफल बनाने के लिए ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन 2 नवंबर को झज्जर में जोरदार विरोध प्रदर्शन करेगा और प्रधानमंत्री के नाम एक बार फिर ज्ञापन देकर तीनों काले कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंकने और बिजली बिल 2020 को वापस लेने की मांग करेगा। 2 नवंबर को झज्जर के विरोध प्रदर्शन में रोहतक, हिसार व गुड़गांव मंडल के सभी जिलों के किसान भाग लेंगे। यह घोषणा आज रेवाड़ी में आयोजित प्रेसवार्ता में ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवान ने की।
उन्होंने कहा कि भाजपा की मोदी सरकार ने 4 बड़े हमले किसानों पर किए हैं। आवश्यक वस्तु कानून को बदल कर देश के गरीब से गरीब इंसान की जरूरत की 6 जरूरी चीजें – अनाज, दाल, आलू, प्याज, खाद्य तेल और तिलहन उनसे छीन लिया है। इन्हें कानूनी रूप से जमाखोरों व कालाबाजारियों के सुपुर्द कर दिया है। इससे किसान व खेती पर निर्भर सभी की रोजी- रोटी पर भारी संकट आयेगा। बाइट : कॉमरेड सत्यवान : राष्ट्रीय अध्यक्ष : ऑल इंडिया किसान खेत मजदुर संगठन।
मण्डी कानून बदल कर तमाम चालू अनाज मंडियों को बंद करने का इंतजाम कर दिया और खेती की तमाम उपज पर बड़ी कंपनियों का बेरोकटोक पूरा कब्जा कायम करा दिया है। किसानों को ‘आजादी’ व ‘रक्षा कवच’ कोरी झूठ और 21वीं सदी के सबसे बड़े छल हैं।
इसी तरह, अनुबंध खेती के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से अब कंपनियों को खेतों का मालिक बना दिया है। किसान अपने ही खेत में मुजारे से भी बुरे हालात में फंस जायेगा।
बिजली के उत्पादन व सप्लाई को भी सरकार प्राइवेट मालिकों के हाथ में देना चाहती है। रेवाड़ी व महेन्द्रगढ़ जिलों समेत किसानों की खुशहाली को ग्रहण लग जायेगा। बिजली में जो सब्सिडी मिलती है, वह बन्द हो जायेगी।
सत्यवान ने बताया कि खाद, बीज, डीजल, कृषि औजार व कीटनाशकों में मिलने वाली सब्सिडी पूर्ववर्ती सरकारें पहले ही खत्म कर चुकी हैं। भूमि हदबन्दी कानून ताक पर रखा हुआ है। यदि अब इन काले फरमानों को नहीं रोका गया तो पीढ़ियां रोती रह जायेंगी और कृषि क्षेत्र पर बड़े पूंजीपतियों का कब्जा हो जायेगा। लेकिन देश का किसान ऐसा हरगिज नहीं होने देगा। वह हर जगह इन कानूनों की प्रतियां फाड़ कर होली फूंक रहा है। दशहरा पर कोरपोरेटों के पुतले दहन किये जायेंगे। गांव – गांव में संघर्ष कमेटियाँ बनाकर आंदोलन को धरातल पर मजबूत करने की तैयारियां देशभर में चल रही हैं।
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन ने प्रेस वार्ता में आज किसानों को दो नवम्बर को झज्जर पहुंचने का न्यौता दिया। इस मौके पर संगठन के किसान नेता रामकुमार नीमोठ, अमर सिंह राजपरा, रामफल भांकली व एआईयूटीयूसी के प्रदेशाध्यक्ष कामरेड राजेन्द्र सिंह एडवोकेट आदि मौजूद थे। 

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