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बलात्कार मामलों में पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्रालय ने जारी किए सख़्त दिशानिर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करके महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के संबंध में पुलिस द्वारा की जाने वाली अनिवार्य कार्रवाई के बारे में बताया है.

यह एडवाइजरी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी की गई है.

1. संज्ञेय अपराधों के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज की जाए. कानून के मुताबिक, पुलिस अपने थाने के बाहर हुई घटना के मामले में जीरो एफआईआर भी दर्ज कर सकती है.

2. संज्ञेय अपराधों के सिलसिले में एफआईआर दर्ज करने में नाकाम रहने पर सरकारी कर्मचारी के ख़िलाफ़ आईपीसी के सेक्शन 166 के तहत दंड का प्रावधान है.

3. सीआरपीसी का सेक्शन 173 रेप के मामलों में दो महीनों में जांच पूरी करने की बात करता है. इस सिलसिले में गृह मंत्रालय ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया हुआ है जहां ऐसे मामलों को ट्रैक किया जा सकता है.

4. यौन हमले/रेप पीड़िता का परीक्षण 24 घंटे के भीतर सहमति से किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर से कराया जाना चाहिए.

5. मृतका का लिखित या मौखिक बयान एक साक्ष्य के तौर पर लिया जाएगा.

6. यौन हमलों के मामलों में फॉरेंसिक साक्ष्य इकट्ठे करने के संबंध में गृह मंत्रालय ने गाइडलाइंस जारी की हैं. ऐसे मामलों की जांच के लिए पुलिस को एसएईसी किट्स दी गई हैं.

7. कानूनी तौर पर सख्त प्रावधानों और कैपेसिटी बढ़ाने के उपायों के बावजूद पुलिस की ओर से अगर इन अनिवार्य आवश्यकताओं का पालन नहीं किया जाता है तो यह देश में आपराधिक न्याय देने को प्रभावित कर सकता है. अगर इस तरह की खामियां पाई जाती हैं तो इनकी जांच होनी चाहिए और इनके लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ तत्काल सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

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8. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश सभी संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में जरूरी दिशानिर्देश जारी कर सकते हैं ताकि इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके.

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