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संसद में किसान विरोधी कानून पारित होने पर भारतीय युवा कांग्रेस ने मोदी सरकार से किये सवाल

Indian Youth Congress questions Modi government when anti-farmer legislation is passed in Parliament

 

देश में धीरे-धीरे निजीकरण की तलवार प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रही है | मोदी सरकार द्वारा देश के प्रत्येक क्षेत्र में एक के बाद एक निजीकरण का मामला बढ़ता ही जा रहा है | अब सवाल यहां पर यह उठता है कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा निजीकरण को बढ़ावा देने के पीछे मकसद क्या है ? कांग्रेस पार्टी ने बार-बार आरोप लगाया है कि निजीकरण से सिर्फ गिने-चुने कुछ पूंजीपतियों को ही फायदा हो सकता है | देश की संपत्ति पर कुछ गिने-चुने व्यक्तियों का एकाधिकार हो जाएगा जिसके कारण भारत में प्राचीन समय में चलने वाली रियासतों की तरफ भारत बढ़ता ही जा रहा है| जिस तरह प्राचीन समय में देश के तमाम संसाधनों पर राजाओं का अधिकार हुआ करता था उसी तरह निजीकरण के प्रभाव के चलते देश के तमाम संसाधनों पर अधिकार कुछ गिने-चुने पूंजीपतियों का हो जाएगा | जिसका परिणाम यह होगा कि देश में रहने वाले लोगों के बीच आर्थिक असमानता की दूरियां बहुत बढ़ जाएंगी जिससे दास एवं शोषण व्यवस्थाएं फिर से देश में जिंदा होने लगेगी | कांग्रेस पार्टी निजीकरण का लगातार विरोध करती रही है| सरकार ने देश के अनेक सरकारी संस्थानों को कुछ पूंजीपतियों के हाथों गिरवी रखने के बाद अब देश की कृषि व्यवस्था की तरफ निजी करण का कदम बढ़ाया है अभी फिलहाल संसद में तमाम संगठनों के विरोध के बावजूद किसान विरोधी कानून पास कर दिया है | जिससे आत्महत्या कर रहे किसानों के मामले और अधिक बढ़ने की संभावना है |

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री निवास के नेतृत्व में आज हरियाणा के पानीपत में किसान विरोधी कानून का विरोध करने के लिए व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाया गया पुलिस के दमनकारी रवैया से काफी कार्यकर्ताओं को गंभीर चोट पहुंची है |

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दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रभारी डॉ अनिल मीणा ने बताया कि भारतीय युवा कांग्रेस की तरफ से भारतीय जनता पार्टी के सांसदों से कुछ सवाल किए हैं जो मोदी का समर्थन कर रहे हैं

1. अगर सरकार की MSP को लेकर नीयत साफ है तो वो मंडियों के बाहर होने वाली ख़रीद पर किसानों को MSP की गारंटी दिलवाने से क्यों इंकार कर रही है??

2. MSP से कम ख़रीद पर प्रतिबंद लगाकर, किसान को कम रेट देने वाली प्राइवेट एजेंसी पर क़ानूनी कार्रवाई की मांग को सरकार खारिज क्यों कर रही है?? कोरोना काल के बीच इन तीन क़ानूनों को लागू करने की मांग कहां से आई?? ये मांग किसने की?? किसानों ने या औद्योगिक घरानों ने??

3. देश-प्रदेश का किसान मांग कर रहा था कि सरकार अपने वादे के मुताबिक स्वामीनाथन आयोग के सी2 फार्मूले के तहत MSP दे, लेकिन सरकार ठीक उसके उल्ट बिना MSP प्रावधान के क़ानून लाई है.. आख़िर इसके लिए किसने मांग की थी??

4. प्राइवेट एजेंसियों को अब किसने रोका है किसान को फसल के ऊंचे रेट देने से?? फिलहाल प्राइवेट एजेंसीज मंडियों में MSP से नीचे पिट रही धान, कपास, मक्का, बाजरा और दूसरी फसलों को MSP या MSP से ज़्यादा रेट क्यों नहीं दे रहीं??

5. उस स्टेट का नाम बताइए जहां पर हरियाणा-पंजाब का किसान अपनी धान, गेहूं, चावल, गन्ना, कपास, सरसों, बाजरा बेचने जाएगा, जहां उसे हरियाणा-पंजाब से भी ज्यादा रेट मिल जाएगा??

6. जमाखोरी पर प्रतिबंध हटाने का फ़ायदा किसको होगा- किसान को, उपभोक्ता को या जमाखोर को??

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7. सरकार नए क़ानूनों के ज़रिए बिचौलियों को हटाने का दावा कर रही है, लेकिन किसान की फसल ख़रीद करने या उससे कॉन्ट्रेक्ट करने वाली प्राइवेट एजेंसी, अडानी या अंबानी को सरकार किस श्रेणी में रखती है- उत्पादक, उपभोक्ता या बिचौलिया??

8. जो व्यवस्था अब पूरे देश में लागू हो रही है लगभग ऐसी व्यवस्था तो बिहार में 2006 से लागू है.. तो बिहार के किसान इतना क्यों पिछड़ गए? बिहार या दूसरे राज्यों से हरियाणा में BJP-JJP सरकार के दौरान धान जैसा घोटाला करने के लिए सस्ते चावल मंगवाए जाते हैं.. तो सरकार या कोई प्राइवेट एजेंसी हमारे किसानों को दूसरे राज्यों के मुकाबले मंहगा रेट कैसे देगी??

9. टैक्स के रूप में अगर मंडी की इनकम बंद हो जाएगी तो मंडियां कितने दिन तक चल पाएंगी??

10. क्या रेलवे, टेलीकॉम, बैंक, एयरलाइन, रोडवेज, बिजली महकमे की तरह घाटे में बोलकर मंडियों को भी निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा??

11. अगर ओपन मार्केट किसानों के लिए फायदेमंद है तो फिर “मेरी फसल मेरा ब्योरा” के ज़रिए क्लोज मार्केट करके दूसरे राज्यों की फसलों के लिए प्रदेश को पूरी तरह बंद करने का ड्रामा क्यों किया??

12. अगर हरियाणा सरकार ने प्रदेश में 3 नए कानून लागू कर दिए हैं तो फिर मुख्यमंत्री खट्टर किस आधार पर कह रहे हैं कि वह दूसरे राज्यों से हरियाणा में मक्का और बाजरा नहीं आने देंगे??

13. अगर सरकार सरकारी ख़रीद को बनाए रखने का दावा कर रही है तो उसने इस साल सरकारी एजेंसी FCI की ख़रीद का बजट क्यों कम दिया? वो ये आश्वासन क्यों नहीं दे रही कि भविष्य में ये बजट और कम नहीं किया जाएगा??

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14. जिस तरह से सरकार सरकारी ख़रीद से हाथ खींच रही है, क्या इससे भविष्य में ग़रीबों के लिए जारी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में भी कटौती होगी??

15. क्या राशन डिपो के माध्यम से जारी पब्लिक डिस्ट्रीब्युशन सिस्टम, ख़रीद प्रक्रिया के निजीकरण के बाद अडानी-अंबानी के स्टोर के माध्यम से प्राइवेट डिस्ट्रीब्युशन सिस्टम बनने जा रहा है?

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