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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तो ठीक था पर बीए पास खेल में मेडलिस्ट बेटी तैं मजदूरी करवाओ यो ठीक नहीं

Beti Bachao Beti Padhao it's fine, But girl who is well educated medalist in game doing labour job, it's not  fiine 

  1. सूखी रोटी खाकर प्रदेश का नाम किया रोशन
  2. सरकार की ओर से नहीं मिली कोई मदद
  3. दलित की बेटी ने मजदूरी करते हुए पढ़ाई के साथ खेल में दिखाए जौहर
  4. सरकार नौकरी दे ताकि कर सकूं अपने परिवार का भरण-पोषण, खेल को रख सकूं जारी
  5. सरकार मदद करे तो देश के लिए अन्तर्राष्ट्रीय खेलों में भी ला सकती है गोल्ड मैडल
  6. सरकार लाखों रुपए प्रति माह मोटी रकम देकर प्रख्यात अभिनेत्रियों, खिलाड़ियों व अन्य स्टारर को बनाती हैं ब्रांड एम्बेसडर
  7. अब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान नहीं बल्कि बेटी बचाओ बेटी से मजदूरी कराओ अभियान बना
  8. दुख की बात यह है कि जब गरीब छात्रा को पढ़ाई या खेल हेतु मदद की जरुरत होती है तो स्वयं सीएम मनोहर लाल खट्टर तक बजट न होने की दुहाई देकर सहायता करने से साफ कर चुके हैं मना

 

12 बार नेशनल और 24 बार स्टेट गेम खेलने के बाद अनुसूचित जाति की ग्रेजुएट लड़की मनरेगा में दिहाड़ी करने को मजबूर हो तो इसे हरियाणा सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे, लोक लुभावन खेल नीति के साथ सरकार अनुसूचित जाति और महिला उत्थान के दावों पर करारा तमाचा कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत हरियाणा से ही की गई थी। हरियाणा सरकार भी इस अभियान की सफलता के बड़े-बड़े दावे अख़बारों में विज्ञापन प्रकाशित करवा और सड़कों पर बड़े-बड़े बैनर लगवा कर आए दिन करती रहती है।
रोहतक के इंद्रगढ़ गांव की दलित परिवार की बेटी शिक्षा 12 बार नेशनल और 24 बार स्टेट गेम में लोहा मनवाने के बावजूद मनरेगा में दिहाड़ी करने को मजबूर है तो कभी खेतों में मजदूरी। परिवार में खाने के लाले होने के कारण व खुद की मनरेगा कॉपी न बनने के कारण शिक्षा माता-पिता की सहायता करवाती है और 2 रोटी के लिए संघर्ष कर रही है।
शिक्षा को अब मनरेगा में काम नहींं मिला तो अब वह खेत में धान की रोपाई कर काम कर रही है। शिक्षा के मजदूर माता-पिता ने दिहाड़ी मजदूरी कर बेटी को चैम्पियन बनाया और इस मुकाम तक पहुंचाया है। शिक्षा 3 बार ऑल इंडिया 9 बार राष्ट्रीय चौंपियन और 24 बार स्टेट में में अपना लोहा मनवा चुकी है । शिक्षा वुशू में हरियाणा में गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी है लेकिन सरकार ने अब तक शिक्षा की कोई सहायता नहीं की है, जिसके बाद लॉकडाऊन में शिक्षा मनरेगा में काम करने के अलावा खेतों में दिहाड़ी करने पर मजबूर है। उन्होंने कहा कि बेटी को दिहाड़ी मजदूरी करके ही पढ़ाया लिखाया और खिलाड़ी बनाया लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
रोहतक के गांव इंद्रगढ़ की दलित परिवार की बेटी शिक्षा की गरीबी और दरिद्रता से जंग की कहानी सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के दावे के साथ खेल नीति की भी पोल खोल कर रख देती है। विशेषत: इस अभियान के प्रचार प्रसार करने हेतु केन्द्र व हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार लाखों रुपए प्रति माह मोटी रकम देकर प्रख्यात अभिनेत्रियों, खिलाड़ियों व अन्य स्टारर को ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त करती रही है लेकिन दुख की बात यह है कि जब किसी गरीब छात्रा को पढ़ाई या खेल हेतु मदद की जरुरत होती है तो सरकार यहां तक कि स्वयं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तक यह कह कर सहायता करने से साफ मना कर चुके हैं कि इस अभियान के तहत आर्थिक मदद देने हेतु कोई बजट नहीं है। इससे साबित हो गया है कि अब बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान नहीं बल्कि बेटी बचाओ बेटी से मजदूरी कराओ अभियान बन कर रह गया है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ हरियाणा सरकार के अनेक योजनाएं हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए भारी भरकम बजट की व्यवस्था है। खेल नीति में भी खिलाड़ियों के लिए नगद भुगतान के साथ नौकरी में वरीयता के दावे आए दिन सरकार करती है। इसके बावजूद अनुसूचित जाति की इस होनहार बेटी को किसी तरह की मदद न करना सरकार की नीति और नियत पर शक पैदा करता है।
ईमानदार और कर्मठता के लिए विख्यात गृह मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तथा खेल मंत्री संदीप सिंह इस मामले से अभी तक अनभिज्ञ मालूम होते हैं।अगर ये दोनों महानुभाव जानते हुए भी अगर उन्होंने इसका संज्ञान नहीं लिया है तो यह विचारणीय प्रश्न है।
वूशू में नेशनल चैंपियन शिक्षा के मामले में एक और खास बात आपको बता दें कि शिक्षा जिस (क्षेत्र) हल्के में रहती है, वह हल्का उस राजनेता का है, जो बेटियों के लिए बड़ी-बड़ी परियोजनाएं चलाने और अपने खजाने का मुंह बेटियों को खोलने का दावा करते नहीं थकते मगर महम हल्के की इंद्रगढ़ में रहने वाली दलित परिवार की इस बेटी की सुध हल्के के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने भी नहीं ली।
शिक्षा के पिता प्यारे लाल ने बताया कि चुनाव के समय तो बलराज कुंडू मिलने आए थे और आश्वासन भी दिया था। उसके बाद जब उनसे मिलने गए तो मिले ही नहीं।

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बाईट – राज देवी, गोल्ड मैडलिस्ट, वुशू खिलाड़ी शिक्षा की माता।
बाईट – प्यारे लाल, गोल्ड मैडलिस्ट, वुशू खिलाड़ी शिक्षा के पिता।
बाईट – शिक्षा, गोल्ड मैडलिस्ट, वुशू खिलाड़ी।

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