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सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया फेक न्यूज़ को रोकने को दी गाइड लाइन, रोक अकेले सोशल मेडिया पर क्यों !

Supreme Court gave a guide line to stop fake news on print media, electronic media and social media, why Baneon social media alone!

जिला उपायुक्त द्वारा उच्चत्तम न्यायालय के जिस फैसले के आधार पर यह सोशल मीडिया को प्रतिबंधित किया है उस फैसले में तमाम मीडिया इलक्ट्रोनिक मीडिया ,प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर “फेक न्यूज़” को रोकने के लिए कहा गया है l ऐसा उपयुक्त महोदय के आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दिये गए हवाले में भी वर्णीत है l (जो इस खबर के साथ येलो पैंसिल से चिन्हित किया गया है l )

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की PDF कॉपी पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें
OM dt.1.4.2020 along with Supreme Court Judgement copy (1)

 

जिला भिवानी के जिलाधीश अजय कुमार द्वारा सोशल मीडिया को प्रतिबंधित करने वाला एक आदेश जारी किया गया है l इस आदेश में कहा गया है कि महामारी के दौरान उच्चत्तम न्यायालय के द्वारा प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया व सोशल मीडिया के संबंद में रिट पिटीशन सिविल 468/2020 व 469/2020 में पारित आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि जो कोई भी व्यक्ति आपदा या इसकी गंभीरता के संबंध में झूठी चेतावनी को प्रसारित करता है, जिसके परिणाम स्वरूप समाज में लोगों के बीच घबराहट पैदा करती है, ऐसी झूठी चेतावनी फैलाने वाले व्यक्तियों को एक वर्ष तक कारावास की सजा और जुर्माना से दंडित किया जा सकता है। जिलाधीश द्वारा जारी आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 505-1, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 54 तथा ऐपीडेमिक डिजीज एक्ट 1957 की धारा 1व 2 के तहत दंडनीय होगा।
उपायुक्त महोदय द्वारा उच्चत्तम न्यायालय के जिस फैसले के आधार पर यह सोशल मीडिया को प्रतिबंधित किया है उस फैसले में तमाम मीडिया इलक्ट्रोनिक मीडिया ,प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर “फेक न्यूज़” को रोकने के लिए कहा गया है l ऐसा उपयुक्त महोदय के आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दिये गए हवाले में भी वर्णीत है l (जो इस खबर के साथ येलो पैंसिल से चिन्हित किया गया है l ) उपयुक्त महोदयी के आदेशों में स्पष्ट हैं कि जो व्यक्ति झूठी सूचना फैलाएगा जिस से समाज में घबराहट फैले उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी जिस में एक साल तक की सजा का प्रावधान भी है l
उपायुक्त महोदय के इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी अध्यन्न किया l दोनों फैसलों के अध्यन्न से स्पष्ट हुआ कि सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला वह फेक न्यूज़ को रोकने के लिए है l इस फैसले में कहीं भी अकेले सोशल मीडिया का कहीं भी जिक्र नहीं है l फेक न्यूज़ की आशंकाएं तो प्रिंट मीडिया , इलेक्टॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया सभी पर एक समान हैं l फिर सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना कहाँ तक उचित है !
पत्रकारिता को समर्पित कई वरीष्ठ पत्रकार जो कि वर्तमान में सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं और अपना वेब पोर्टल चला रहे हैं उनका इस तरह के फैसलों से चिंतित होना स्वभाविक है l इस तरह के फैसले संविधान में प्रदत अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन है वहीं उच्चतम न्यायालय के आदेशों की तारपीडो के साथ एक विशेष वर्ग को डराने के उद्देश्य से की गई भेदभाव पूर्ण करवाई की बू भी आती है l कितना अच्छा होता उपायुक्त महोदय उन सोशल मीडिया के खिलाफ कोई कानूनी एक्शन लेते जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले में तय गाइड लाइन की उलंघना की हो ! माननीय न्यायालय के आदेशों की पालना हम सबकी जिम्मेदारी के साथ फ़र्ज़ भी है l सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले में जब सब कुछ लिखा ही जा चुका है तो फिर अलग से आदेशों की जरूरत क्यों आन पड़ी ? सोशल मीडिया पर से लगाई गई रोक के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की गई l इस संबंध में जिला भिवानी उपायुक्त अजय कुमार से मिल कर अपनी बात रखने का फैसला किया गया l

मनोज मलिक को चुना कार्यकारी अध्यक्ष
इस बैठक में सर्वप्रथम हरियाणा यूनियन ऑफ वेब जर्नलिस्ट का गठन किया गया जिसका कार्यकारी अध्यक्ष (अगली व्यवस्था तक) मनोज मालिक को चुना गया l

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