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देश के लिए चार लड़ाइयां और दूसरा विश्व युद्ध लड़ चुके मेज़र गुरदियाल सिंह का 102 साल की उम्र में देहांत

Mezor Gurdial Singh, who fought four battles for the India and World War IInd, died at the age of 102

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दूसरे विश्व युद्ध से लेकर देश के लिए चार बड़ी लड़ाई लड़ने वाले 102 वर्षीय मेजर गुरदयाल सिंह का देहांत हो गया है। शुक्रवार को भारतीय सेना के जवान अपने हीरो को अंतिम सलामी देने के लिए विशेष तौर पर लुधियाना पहुंचे। उनके शव को तिरंगे में लपेट कर श्रद्धांजलि दी गई। वहीं जिला प्रशासन का कोई अधिकारी और कोई नेता उनके अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचा। प्रशासन के इस रवैये से आहत मेजर के परिजनों का कहना है कि सेना के लिए वह हीरो थे, लेकिन प्रशासन को उनसे क्या लेना था।
मेजर गुरदयाल सिंह का परिवार एक सदी से ज्यादा समय से सेना के साथ जुड़ा है। इस समय उनकी चौथी पीढ़ी यानी उनका पोता भारतीय सेना में तैनात है। मेजर गुरदयाल सिंह के बेटे हरमंदरजीत सिंह ने बताया कि उनके पिता का जन्म 21 अगस्त 1917 को लुधियाना के गांव हरनामपुरा में हुआ था। उन्होंने रॉयल इंडियन मिलिट्री स्कल जालंधर में शिक्षा ली। जून 1935 में माउंटेन आर्टिलरी ट्रेनिंग ज्वाइन की। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग 14 राजपूताना माउंटेन बैटरी एबटाबाद (पाकिस्तान) में हुई थी।
1944-45 में हुए दूसरे विश्व युद्ध के समय मेजर गुरदयाल सिंह बर्मा (म्यांमार) में तैनात थे। इस युद्ध में एक जापानी जवान ने उन पर हमला कर दिया था। मेजर गुरदयाल सिंह के पेट में गोली लगी थी। इससे पहले कि जापानी जवान दूसरी गोली चलाता, मेजर के साथियों ने उसे वहीं ढेर कर दिया। इसके बाद मेजर गुरदयाल सिंह ने 1947-48 में जम्मू कश्मीर में हुए युद्ध में भी अहम रोल अदा किया। 1965 के भारत पाक युद्ध के समय मेजर को भारतीय सेना की तरफ से अमृतसर सेक्टर में देश की सेवा करने का मौका मिला, यहां पर वह गनर अफसर के तौर पर तैनात रहे। 1967 में वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो गए थे।

 

पिता ने लड़ा था पहला विश्व युद्ध
देश के प्रति सेवा का जज्बा मेजर गुरदयाल के परिवार में शुरू से रहा है। मेजर गुरदयाल सिंह के पिता रिसालदार दलीप सिंह ब्रिटिश इंडियन आर्मी में तैनात थे। पहले विश्व युद्ध के समय वह मेसोपोटामिया में तैनात रहे थे। देश सेवा का भाव परिवार में आगे इसी तरह जारी रहा। मेजर गुरदयाल सिंह के दो बेटे हैं।

बड़ा बेटा हरजिंदरजीत सिंह बतौर कर्नल भारतीय वायुसेना से 2001 में रिटायर हुए। छोटे बेटे हरमंदरजीत सिंह भारतीय सेना से बतौर कर्नल 2004 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब इस परिवार की चौथी पीढ़ी यानी मेजर गुरदयाल का पोता कर्नल कर्ण गुरमिंदर सिंह देश की सेवा में तैनात है। उनकी पत्नी लेफ्टिनेंट कर्नल मंदीप कौर भी सेना में डॉक्टर हैं।

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