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निजी स्कूल किसी भी हालत में नहीं भरेंगे बोर्ड जुर्माना- कुंडू

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने दी बोर्ड का घेराव करने की चेतावनी

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मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री से जल्द ही मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

22 मई। हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने मार्च 2019 में परीक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित रहे निजी स्कूल अध्यापकों पर लगाए गए पांच पांच हजार रूपए जुर्माने को न भरने की सूरत में बोर्ड संबंधित स्कूल का बोर्ड रिजल्ट रोके जाने की धमकी पर कड़ा रोष जताया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू, संरक्षक तेलुराम रामायणवाला, महासचिव राजेंद्र बाढड़ा, प्रांतीय उपप्रधान सुरेश पंघाल, एडवाइजर घनश्याम शर्मा, साधुराम जाखड़ व महाबीर यादव ने कहा कि बोर्ड चेयरमैन ने प्राइवेट स्कूल प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में उक्त जुर्माने को माफ करने का वादा किया था, लेकिन अब इस जुर्माने को भरने के लिए 25 मई की तिथि निर्धारित करते हुए बोर्ड रिजल्ट रोकने की धमकी दी जा रही है। संघ नेताओं ने कहा कि निजी स्कूल संचालक किसी भी सूरत में यह जुर्माना नहीं भरेंगे और दबाव में आकर अगर किसी स्कूल ने जुर्माना भर भी दिया है तो उसे वापस दिलवाने के लिए जल्द ही एक प्रतिनिमंडल मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री से मिलकर अपना पक्ष रखेगा।

प्रदेशाध्यक्ष सत्यावन कुंडू ने कहा कि जब से डॉ जगबीर सिंह बोर्ड चेयरमैन बने हैं, तब से प्राइवेट स्कूलों को परेशान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है। पिछली वार्षिक परीक्षा में प्राइवेट स्कूलों के एग्जाम सेंट 35 से 40 किमी दूर करना यही दर्शाता है कि चेयरमैन प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अस्थाई स्कूलों की संबंद्धता फीस दो हजार से बढ़ाकर दस हजार रूपए करने और जिन स्कूलों को 20 हजार रूपए भरने के बाद स्थाई संबद्धता मिली थी, उन पर भी दो हजार रूपए निरंतरता फीस हर वर्ष लगाना बोर्ड चेयरमैन का तानाशाही रवैया रहा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड को एक ही आदमी अपनी मनमर्जी से चला रहा है और प्राइवेट स्कूलों पर तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों की हालत पहले ही ठीक नहीं है। फिर इस लॉकडाउन के दौरान माफ मरने के बाद भी पांच पांच हजार रूपए का जुर्माना लगा दिया गया है, जो असहनीय है। उन्होंने कहा कि बोर्ड पर भी जुर्माना लगना चाहिए, क्योंकि बोर्ड ने 20 मई को दसवीं का रिजल्ट घोषित करने का ऐलान करने के बावजूद रिजल्ट घोषित नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल संचालक लेट करता है तो जुर्माना लगा दिया जाता है और बोर्ड कोई गलती करता है तो कोई जुर्माना नहीं। कुछ स्कूल संचालकों ने अपनी स्थाई मान्यता का पत्र बोर्ड की ऐफिलेशन ब्रांच में जमा करवा दिया था, लेकिन ब्रांच ने 12वीं की ब्रांच में ही अपना पत्र लेट भेजा। इस पर भी बोर्ड चेयरमैन ने अपने तुगलकी फरमान से उन स्कूलों पर डेढ डेढ लाख रूपए का जुर्माना लगा दिया, जबकि गलती बोर्ड प्रशासन की थी। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालक बोर्ड चेयरमैन के ऐसे तुगलकी फरमानों का विरोध करता है और मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से मिलकर इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ उठाया जाएगा।

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