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कोरोना संक्रमण काल में भी फीस को लेकर निजी स्कूल संचालक मनमानी और दादागिरी पर उतरे

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रोहतक से अनूप कुमार सैनी की रिपोर्ट

अभिभावकों को दबाने व शिकायत वापिस करवाने के लिए पुलिस में केस दर्ज कराने की धमकी दे रहे हैं निजी स्कूल संचालक
सरकार के निर्देशों को ठेंगा दिखा अभिभावकों से पूरी फीस मांग रहे हैं स्कूल संचालक
पठानिया पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ने पत्रकारों से कैमरे के सामने बात करने से किया साफ मना

रोहतक। कोरोना संक्रमण काल में भी फीस को लेकर निजी स्कूल मनमानी और दादागिरी पर उतर आए हैं। एक ओर सरकार ने जहां निजी स्कूल संचालकों को अभिभावकों से बच्चों की सिर्फ ट्यूशन फीस ही लेने के निर्देश दिए थे। स्कूलों से कहा गया था कि वे बच्चों से वार्षिक फीस, बिल्डिंग फंड सहित अन्य कोई भी शुल्क न लें।
आरोप है कि कई स्कूलों ने तो नियमों को ताक पर रखकर ट्यूशन फीस से दूसरे शुल्क जोड़ कर इसे बढ़ा दिया है। इन शिकायतों को लेकर कुछ अभिभावक सोशल मीडिया पर बढ़ी फीस को लेकर वीडियो तक वायरल कर रहे हैं बल्कि स्कूलों के भेजे हुए मैसेज भी अभिभावक मीडिया को भेज रहे हैं। लगता है कि शिक्षा विभाग शिकायत के बावजूद गंभीर नहीं है, तभी तो निजी स्कूल संचालकों के हौंसले बढ़े हुए हैं। दूसरी और जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हैरत की बात है कि स्कूल संचालकों ने सरकार के इन निर्देशों को न केवल ठेंगा दिखा अभिभावकों से पूरी फीस मांग रहे हैं। कहीं फोन करके स्कूल प्रशासन 3 महीने की फीस जमा कराने की बात कह रहा है तो कहीं 10 से 30,000 रुपए फीस जमा करवाई जा रही है। जो अभिभावक सिर्फ़ ट्यूशन फीस देना चाहते हैं, उन्हें उनके बच्चों को दाखिला न देने की न साफ इंकार कर रहे हैं।
सिर्फ यही नहीं, अभिभावकों को दबाने के लिए स्कूल प्रशासन पुलिस का भी सहारा लेने से नहीं बोल रहे हैं। जो अभिभावक स्कूल संचालकों के खिलाफ जिला प्रशासन को शिकायत कर रहे हैं, उनके खिलाफ स्कूल संचालक कोई ओफेंस बने बिना ही पुलिस में उनके खिलाफ शिकायतें तक देनी शुरू कर दी गई हैं ताकि अभिभावक डर कर प्रशासन के पास जो उनकी शिकायत दी गई है, वस उसे वापिस ले ले।
ऐसा ही एक मामला रोहतक में सामने आया है। यूं तो निजी स्कूल संचालकों द्वारा सरकार द्वारा निर्धारित फीस से अधिक लेने के अनेक मामले हैं किंतु सबसे चर्चित पठानिया पब्लिक स्कूल का मामला है।
गोहाना रोड पर स्थित पठानिया पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पिता अभिभावक राजेश डबास ने बताया कि स्कूल से उनके पास फोन आया था कि आप तुरन्त पूरी फीस (वार्षिक फीस, बिल्डिंग फंड सहित अन्य शुल्क) भरें वरना बच्चों का नाम काट दिया जाएगा। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत दी गई है। इसमें निजी स्कूल की मनमानी फीस का खुलासा किया गया।
वाहन को छोड़कर स्कूल प्रबंधन सभी शुल्क वसूल रहा है। इसके बगैर बच्चों का दाखिला देने से साफ इंकार कर दिया है जबकि सरकार ने केवल ट्यूशन फीस वसूलने की अनुमति दे रखी है। ट्यूशन फीस भी अपनी मर्जी से पढ़ाई हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि इसकी शिकायत अधिकारियों को करने पर स्कूल संचालकों ने उनके खिलाफ पहले पुलिस की साईबर सेल शिकायत कर दी। हम वहां गए भी लेकिन आईओ ने उन्हें शिकायत दिखाने व शिकायत उपलब्ध करवाने से साफ इंकार कर दिया जबकि उक्त शिकायत की प्रति लेने का उनका कानूनी अधिकार है। पुलिस अधिकारी ने बिना शिकायत दिखाए ही मुझे बयान लिखाने को कहा तो मैंने बयान देने से साफ इंकार कर दिया।
अभी वे घर भी नहीं पहुंचे थे कि उनके पास सैक्टर-3 पुलिस थाने से फोन आया कि आपके खिलाफ शिकायत आई है। आप तुरन्त यहां पहुंचे। वहां थाना प्रभारी ने कहा कि आपके खिलाफ कोई ओफेंस नहीं बनता। अभिभावक राजेश डबास ने कहा कि उन्हें संविधान और सभी अन्य संगठनों पर पूरा भरोसा है कि वे न्याय का साथ देंगे।
जब इस संबंध में पठानिया पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल तानवी पठानिया से मिल कर उनका पक्ष जानना चाहा तो प्रिंसिपल ने कहा कि उन पर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे सभी बेबुनियाद हैं किन्तु कैमरे के समक्ष उन्होंने कुछ भी नहीं बोलने से साफ मना कर दिया। उनका कहना था कि वे इन आरोपों के बारे में पत्रकारों से कुछ दिन के बाद तथ्यों के साथ तथा जिस अभिभावक ने उन पर आरोप लगाए हैं, की माफी के साथ बात करेंगी।
इधर शिक्षा भारती स्कूल के प्रिंसिपल संजय कुमार ने एक सवाल के जवाब में कहा कि निजी स्कूल स्व वित्त पोषित स्कूल होते हैं। इनको सरकार की तरफ से कोई ग्रांट नहीं मिलती। इनके अपने जो रिसोर्सेज होते हैं, उन्हीं से सारे खर्चे चलते हैं। अब 2 माह बीत चुके हैं, मात्र 12 से 15 फीसदी ही मिल पाई है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ बच्चों से सिर्फ मंथली फीस ही ले रहे हैं। हम अन्य कोई फंड मांग ही नहीं रहे हैं।
ग्राम पंचायत के संयोजक संजीव मुदगिल ने कहा कि उनके पास निजी स्कूलों में अधिक फीस वसूलने की अनेक शिकायतें आ रही हैं। संगठन पीड़ित अभिभावकों को न्याय दिलाने के लिए इस मामले को उठा रहा है। इस कड़ी में डीईओ से शिकायत भी की गई है। ग्राम पंचायत ने शासन व प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करवा कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ऐसे शिकायतें अभिभावक संगठन को भी कर सकते हैं।
अभिभावक संघ के अध्यक्ष यशवंत मलिक का कहना है कि निजी स्कूलों ने अभिभावकों का कोई मौका नहीं छोड़ा मारी गाल में भी जारी है। सरकार ने ट्यूशन फीस वसूलने की बात कही है। यह फीस 1200 से 1500 रुपए से बढ़कर 5 से 10000 तक पहुंच गई है। स्कूलों ने सभी तरह के शुल्क इसमें जोड़ दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस मामले को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के उप अधीक्षक शमशेर देशवाल ने कहा है कि स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी तरह का शुल्क वसूल नहीं करा सकते हैं। इस संबंध में उनके कार्यालय ने विगत 23 अप्रैल को सभी गैर सरकारी स्कूलों को पत्र भेजा जा चुका है। इस पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि स्कूल सिर्फ टयूशन फीस ही ले सकता है, बिल्डिंग फंड, रखरखाव फंड, प्रवेश शुल्क व कम्प्यूटर फीस आदि अन्य फंड नहीं वसूल सकेंगे। ऐसा करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पठानिया स्कूल संचालकों द्वारा फीस से अधिक शुल्क मांगने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। जिला शिक्षा अधिकारी चण्डीगढ़ में निदेशालय गई हैं, उन्होंने इस मामले में कोई कार्यवाही की होगी, इसका उन्हें पता नहीं है। शिक्षा भारती स्कूल के संचालकों द्वारा अभिभावकों से टयूशन फीस के अतिरिक्त अन्य शुल्क वसूले जाने के आरोपों पर उनका कहना था कि जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष सोमवार को यह मामला रखा जाएगा। वे ही इस मामले में जांच कर कार्यवाही करेंगी।
इस मामले में जब जिला मौलिक अधिकारी विजय लक्ष्मी नांदल से पठानिया स्कूल के मामले बारे पूछा गया तो उनका कहना था कि यह मामला उनके सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई स्कूल सरकार द्वारा निर्धारित फीस के अतिरिक्त कोई और शुल्क लेता है तो उनके खिलाफ जरूरी कार्यवाही की जाएगी।

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