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जींद के युवा दावा, आयुर्वेद में कोरोना का सस्ता व पूर्ण उपचार

उम्मीद की किरण: शोधार्थी हिमांशु का दावा, कोरोना में रामबाण हो सकता है यह तेल

लेखक:- हिमांशु युवा                                                                                             

कोरोना वायरस: सम्भावना को छोड समाधान के सफर का उदय        
विश्व स्तर पर अपने आतंक से पूरी मानवता को अपने कदमों तले रोंदने वाले एक छोटे मगर भयानक किस्म के वायरस ने जो तहलका मचाया है उससे बडे- बडे विकसित देश औंधे मुंह आ गिरे।पुरे विश्व की अर्थव्यवस्था और उससे जुडी हर व्यवस्था जितनी तेजी से गिरी उतनी ही तेजी से इस वायरस के जबरदस्त प्रहार ने समुची मानव जाति को हिला कर रख दिया है।अब तक इस से होने वाले खामियाजे का मूल्यांकन नहीं हुआ और तबाही चरम पर है। आज मानव जाति जींदगी के लिए फर्श पर रेंग रही है और इलाज अब तक किसी विकसित, विकास शील या तीसरी दुनिया के देश कहे जाने वाले देशों के पास इजाद नहीं हुए।     

बहरहाल भारत सहित अन्य कई देशों में लम्बे लम्बे लॉकडाऊन हुए और कल ही इन लॉकडाऊन को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नकारते हुए कहा इस तबाही का हल निकालने के लिए ठोस कदम उठाने की भी जरूरत है। परंतु कहीं ना कही विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसके इलाज को इजाद नही कर पाया। और जब तक इलाज स्थानीय से व्यापक स्तर पर नहीं होगा इस संक्रमण को रोकना असम्भव होगा।

इस संक्रमण को रोकने के लिए दुनिया कि किसी सरकार या स्वास्थ्य विभाग के पास कोई इलाज नहीं है। फलस्वरूप धरती पर मानव के साथ जीव जगत पर बहुत बडी चोट साबित हो रही है।पुरी दुनिया के सामने “डर का जो माहौल” खडा हुआ बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का “खौफ का बाजार ” अभी तक कोई एंटी डॉट नहीं बना पाया। मै पिछले कई वर्षो से प्रकृति और वनस्पति पर काम कर रहा हुं और आए दिन नये नये औषधीय सफल प्रयोग करता रहा हुं।जिसमें पिछले दो वर्ष पहले कुछ वनस्पतीयों व उनसे निर्मित तेलों पर काम किया।

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जिसमें मैने पाया की सांस में पैदा ने वाले विषाणुऔं को खत्म किया जा सकता है आज कोरोना का अहर है तो संक्रमण रोगो पर बात करूंगा।जुकाम दो प्रकार के संक्रमण से फैलता है जिसे एक को राहीनो वायरस कहते है तथा दुसरे को कोरोना वायरस कहा जाता है सामान्यतः हमें जुकाम राहीनो वायरस के चलते होता है जो आगे चल कर कभी कभार नजले का भी रूप ले लेता है।खांसी का रोग व उससे परिवर्तित टी.बी.का रोग के रूप में बदल जाना। यह लगभग आम समस्या हुई मगर एक बडे स्तर पर विकसित हुई जिसका इलाज इजाद हुआ ।परंतु आज भी टी.बी के मरीज लाखों में मौजूद है। इस पर मैने एक सफल प्रयोग किया।

प्रयोग के दौरान मैने पाया की राहीनो नामक वायरस को खत्म किया जा सकता है क्योंकी जिस प्राकृतिक स्त्रोत से इलाज किया गया था वह था नीलगीरी का पेड इसके तेल में पाया जाने वाला तत्व सेनेओल जो की 70%से 79%तक पाया जाता है। वह सांस में पैदा होने वाले विषाणु,जीवाणु कुछ वायरस और कवक को मारने की क्षमता रखता है।नीलगिरी का तेल एक्स्पेक्टोरेंट का भी काम करता है ।फरवरी 2016 में सर्बिया के शोध में पाया की यह तेल शुद्ध सैनेटाईजर का भी काम करता है जो रोगाणु रोधी है।

।नीलगीरी का तेल प्राकृतिक सैनेटाईजर है जो हाथ ,चेहरे, चमडी पर रगडने से सभी वायरस का नाश करने की क्षमता रखता है।देशभर के कुछ डॉक्टर्स से की गयी बातचीत के दौरान पाया की नीलगिरी में पाये जाने वाला सेनेओल अगर सांस के विषाणुओं को खत्म करता है तो यह कोरोना को भी खत्म कर सकता है इस पर प्रयोग करने की आवश्यकता है ।

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एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, एंटीवायरल, श्वसन समस्या में नीलगिरि तेल में पाया जाने वाला तत्व सेनेओल काफी प्रभावी है।और कोरोना को रोकने का आसान उपाय है।

मै अखिल भारत आयुर्वेदिक संस्थान दिल्ली व सीमैप लखनऊ में कोरोना पर नीलगीरी परिक्षण के लिए पत्र डाल चुका हुं और एक एक पत्र प्रधानमंत्री, स्वास्थ मंत्री और तमाम तरह के स्वास्थ्य संस्थानों में डाल रहा हुं जिससे इलाज व्यापक हो और समस्या पर जल्द काबु पा जा सके।

अगर नीलगीरी के तेल पर स्थानीय स्तर से व्यापक स्तर पर प्रयोग हो तो भारत यकीनन इस जंग को जीत सकता है और विश्व समुदाय को एक बेहतरीन इलाज प्रदान कर सकता है। हम रोजमर्रा की आदतों के साथ इसको प्रयोग में ला सकते है।
०भाप द्वारा:- कोरोना पीडित को को गर्म पानी में कुछ बुंदो के साथ दिन में तीन बार भाप दिलवाई जा ऐगी तो कोरोना संक्रमण से मुक्ति मिलेगी।
०सैनेटाईजर के रूप में:- दिन भर में चार -पांच बार अपने हाथों व मुहं को सैनेटाईज करके हाथ और शरीर साफ रखे।
०पानी में डाल कर नहाने व कुल्ला करके शरीर व मुख को स्वस्थ रखे।
०अपने आस पास पानी में कुछ बुंदों का घोल बना कर छिडकाव करके वातावरण में संतुलन बनाए रखे।
०नीलगीरी के पत्ते जला कर उससे धूप धूनी दे कर वातावरण विषाणु रहित किया जाता है।
यह प्रयोग विधी दोनो तरह के लोगो के प्रयोग के लिए है। संक्रमित व्यक्ति संक्रमण मुक्त होगा और असंक्रमित व्यक्ति संक्रमण से बचा रहेगा।
चीन से मानव प्रसारित वायरस निकला तो परिभाषा थी कोरोना मतलब “कोई रोक ना पाएगा” भारत तक आते आते परिभाषा में बडा बदलाव हुआ कोरोना मतलब “कोई रोड पर ना निकले” पर फिर भी ना रुका आज हम सबको अपने एक स्थान पर रह कर कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है मेरा दावा है की हम इस जंग को विश्व स्वास्थय के लिए जीत जाएंगे।आज देश भर की तमाम लैबोरेट्री, राज्य व केंद्र सरकार, स्वास्थ्य विभाग और आप सब के साथ की सख्त जरूरत है क्योंकी “इस वायरस से लडेंगे एवं दुनिया के लिए जितेंगे” और स्वस्थ जीवन जीएंगे।
मै भी एक परिभाषा दे रहा हूं कोरोना “कोई रोकने वाला नायक आ गया”

लेखक:– हिमांशु युवा
(नोट: यह आलेख कोरोना के प्रारम्भिक काल में लिखा गया था उस समय भी यह कारगर था और आज भी उतना ही कारगर है ऐसा दावा है शोध के बाद हिमांशु का l

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