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समृद्ध एवं परिष्कृत भारतीय उपमहाद्वीप संस्कृति को समस्त संसार में जन जन तक पहुंचाएगा राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन

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भारतीय उपमहाद्वीप में हजारों वर्षों से चली आ रही एक समृद्ध एवं परिष्कृत संस्कृति है जो इस धरा के संतो ऋषियों महाऋषियों साधुओं सन्यासियों वेदाचार्य आयुर्वेदाचार्य धर्माचार्य खगोलविदो ज्योतिषाचार्य कलाविदो साहित्यकारों आदि अद्भुत व्यक्तियों के धनी ब्रह्म विभूतियों द्वारा हमें विरासत में दी गई हैं हजारों वर्षों की हमारी गुलामी ने इस विरासत को धूल की गर्त जमा करा दी है और इसे नष्ट करने का भी एक घृणित प्रयास किया है l

परिणाम स्वरूप हम इस अद्भुत खजाने से स्वत ही मुख विमुख होने लगे एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत पश्चिमी सभ्यता के प्रचारकों द्वारा चाहे वह स्वदेशी हो या विदेशी सब ने हमारे इस अमूल्य विरासत विद्या का इस तरह से उपहास उड़ाना शुरू किया कि जैसे भारतीय खुद ही अपने आप को गवार अनपढ़ अपनी अद्भुत संस्कृति को निम्न रूप से शुरू कर दें भारतीय उपमहाद्वीप की इस अलौकिक दिव्य संस्कृति के दिव्य खजाने से दूर हटा कर अपने जीवन में उतार कर परिवार समाज एवं राष्ट्र को सुख में तेजो में एवं समृद्ध बनाने के उद्देश्य हेतु ही भारतीय संस्कृति संघ की स्थापना की गई है l

भारतीय संस्कृति संघ का मानना है कि समस्त वेद पुराण ग्रंथ उपनिषद विद्या उपदेश का सार अध्यात्म में निहित है जीवन की सभी समस्याओं का उत्तर चाहे वह राजनीतिक धर्म भक्ति गृहस्ती और मुक्ति किसी भी आयाम से संबंधित हो अध्यात्म में ही विद्यमान है भारतीय संस्कृति संघ आध्यात्मिक को केंद्र बिंदु मानते हुए इस पवित्र ज्ञान को अपना प्रेरणा स्रोत मानता है एवं भारतीय संस्कृति संज्ञान लेता है कि आध्यात्मिक के दिखाए रास्तों आंतरिक शक्तियों जागृत कर विद्याओं पर चलकर दिव्य भारतीय संस्कृति से न केवल भारतीय उपमहाद्वीप बल्कि समस्त संसार के प्राणियों को सुख सुख में बनाने के पवित्र उद्देश्य हेतु निरंतर कार्य करेगा

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