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अर्थव्यवस्था पर मंदी की मार, वाहन उद्योग पर बड़ा संकट, 286 शोरूम बंद भारी संख्या में छंटनी

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वाहन उद्योग में एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार
पिछले तीन माह के दौरान खुदरा विक्रेताओं ने करीब दो लाख कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला
18 माह की अवधि में देश के 271 शहरों में गाड़ियों के 286 शोरूम बंद
पिछले डेढ़ साल में करीब 3.5 लाख नौकरियां जा चुकी हैं
अर्थशास्त्र का देसी फार्मूला है कि जब विकास दर में एक फीसद की वृद्धि हासिल होती है तो बाजार में एक करोड़ नए रोजगार सृजित होते हैं।

पिछले दिनों जारी सरकारी आंकड़ों में देश में बेरोजगारी की दर पिछले चार दशक के ज्यादा की अवधि में सबसे ऊंची दर्ज हुई है। आने वाले दिनों में यह समस्या और भयावह होती दिख रही है।
मोदी सरकार ने पिछले पांच साल के कार्यकाल में रिकार्ड आर्थिक वृद्धि हासिल करने का दावा किया है। ऐसे में सवाल यह है कि जब तेज गति से विकास हो रहा है तो फिर नए रोजगार पैदा क्यों नहीं हो रहे? देश में बेरोजगारों की फौज क्यों बढ़ती जा रही है? हकीकत यह है कि रोजगार के मुद्दे पर यह सरकार सबसे ज्यादा बेबस नजर आई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र और वाहन उद्योग की समस्या अब जग जाहिर हैं। इस बात को सरकार भी स्वीकार कर चुकी है लेकिन इनके जख्मों पर मरहम लगाने का कोई काम नहीं किया गया है। अर्थशास्त्र का देसी फार्मूला है कि जब विकास दर में एक फीसद की वृद्धि हासिल होती है तो बाजार में एक करोड़ नए रोजगार सृजित होते हैं।

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उद्योग जगत में छाई सुस्ती, वाहनों की मांग में कमी, वाहन उद्योग में बड़े पैमाने पर छंटनी
उद्योग जगत में सुस्त मांग की वजह से चारों ओर छंटनी का दौर चल रहा है। वाहन उद्योग में यह संकट खतरे की घंटी की ओर इशारा कर रहा है। इस उद्योग में कुल मिलाकर एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। वाहनों की मांग में कमी की वजह से तमाम कंपनियां अब अपने उत्पादन में कटौती कर रह रही हैं। जाहिर तौर पर वाहन उद्योग में बड़े पैमाने पर छंटनी की जा रही है। वाहनों की बिक्री में भारी गिरावट के बीच देशभर में वाहन डीलर बड़ी संख्या में कर्मचारियों की छंटनी कर रहे हैं।

18 माह की अवधि में देश के 271 शहरों में गाड़ियों के 286 शोरूम बंद

स्थिति यह है कि इस साल अप्रैल तक पिछले 18 माह की अवधि में देश के 271 शहरों में गाड़ियों के 286 शोरूम बंद हो चुके हैं जिसमें 32,000 लोगों की नौकरी गई थी।ऑटो सेक्टर में दो लाख नौकरियों की यह कटौती इसके अतिरिक्त है। इस तरह पिछले डेढ़ साल में करीब 3.5 लाख नौकरियां जा चुकी हैं। चिंता की बात यह है कि अच्छे चुनावी परिणाम और बजट के बावजूद वाहन क्षेत्र की सुस्ती दूर नहीं हो पाई है। इस वजह से और शोरूम बंद होने का संकट बना हुआ है।

फिलहाल ज्यादातर छंटनियां फ्रंट और बिक्री केंद्रों में हो रही हैं लेकिन सुस्ती का यह रुख यदि जारी रहता है तो तकनीकी नौकरियां भी प्रभावित होंगी। यह तो महज बानगी है। देश के अन्य उद्योगों की भी कमोबेश यही स्थिति है।

उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) की रिपोर्ट बताती है कि पिछले तीन माह के दौरान खुदरा विक्रेताओं ने करीब दो लाख कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकाला। निकट भविष्य में स्थिति में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है।

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