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हरियाणा

संसारिक वस्तुओं का मोह मूर्खता:जया किशोरी 

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राजेंद्र कुमार
सिरसा, 13 अगस्त। संसारिक वस्तुओं का मोह मूर्खता है। इंसान संसारिक मोह माया में ही फंसा हुआ है। जबकि उसे प्रभू के साथ मोह लगाना चाहिए। ईश्वर के साथ मोह लगाने से इस नश्वर संसार से मुक्ति हासिल हो सकती है। उपरोक्त विचार कथावाचक जयाकिशोरी ने गावं धोतड़ में ‘नानी बाई को मायरो’ के आयोजन के दौरान पहुंचे श्रद्धालुओं के समक्ष प्रकट किए। जया किशोरी ने कृष्ण-सुदामा की दोस्ती, कृष्ण व भक्त नरसी का प्रेम कथा के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी गहन चिंतन-मनन् किया और सामाजिक बुराइयों को त्यागने का आह्वान किया।
जया किशोरी ने कहा कि जिस प्रकार हम अपने मां-बाप, पुत्र, भाई-बहन व रिश्तेदारों से प्रेम भाव रखते हैं। उसी प्रकार हमें परमात्मा से भी अपनापन रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपनेपन में जो शक्ति होती है वो पद, प्रतिष्ठा व योग्यता में भी नही होती। अपनापन होने पर दूसरे पर अधिकार हो जाता है। अपनेपन होने से ही भगवान भक्त के हाथों बंध जाते हैं , इसलिए मनुष्य को ईश्वर से लगाव रखना चाहिए। उसे अपनेपन की डोर में बांधना चाहिए। अपनेपन में वो शक्ति है जो जटिल से जटिल काम भी करवा सकती है। जया किशोरी ने भ्रूण हत्या पर करारी चोट की। उन्होंने लिंग भेद को समाप्त करने और कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया।
नानी बाई को मायरो कथा के तीसरे दिन नानी बाई को मायरो कथा के दौरान भक्त नरसी और भगवान कृष्ण के प्रेम कथा का वर्णन किया। प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भक्त नरसी टूटी-फूटी गाड़ी और बूढ़े मरियल बैल लेकर अंजारनगर रवाना होते हैं। मायरे के नाम पर छोटी मोटी तुमडिय़ा, गोपी चंदन और करताल ही उनके पास है। रास्ते में उनकी गाड़ी टूट जाती है। भगवान कृष्ण को उन पर दया आती है और वे सहायता करने के लिए बढ़ई का वेश धारण कर वहां पहुंचते हैं और नरसी की गाड़ी सुधारते हैं। बीमार बैलों के सिर पर हाथ फेरते हैं तो बैल स्वस्थ हो जाते हैं। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त की मदद करने के लिए स्वयं अवतरित होते हैं।
कथा के समापन पर गोपाल कांडा ने अनेक ग्रामीणों ने आरती की व प्रसाद का वितरण किया। गोपाल कांडा ने कहा कि सत्संग-कथा से सामाजिक समरस्ता बढती है । श्री बाबा तारा कुटिया के मुख्य सेवक गोबिंद कांडा ने कथा श्रवण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं का आभार जताया।

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