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अफसरों की सम्पति का ब्यौरा सार्वजनिक करने का मामला: सरकार चाहती नहीं या अफसर मान नहीं रहे

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सूचना आयोग के आदेश के बावजूद सरकार ने सार्वजनिक नहीं किया प्रदेश के सभी अफसरों की सम्पति का ब्यौरा
-पहली अप्रैल से ब्यौरा पोर्टल पर सार्वजनिक करना था
– सरकार ने खुद राज्य सूचना आयोग को दी थी सहमति

चंडीगढ़

आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर

हरियाणा सरकार नौ महीने बीत जाने पर भी प्रदेश के सभी अफसरों की सम्पति का ब्यौरा सार्वजनिक करने के राज्य सूचना आयोग व हरियाणा सरकार के अपने फैसले को लागू नहीं करा पाई। सम्पति का ब्यौरा पहली अप्रैल तक अपलोड करना था। इस बारे राज्य सूचना आयुक्त हेमंत अत्री व शिव रमन गौड़ की फुल बैंच ने नौ महीने पहले 30 अक्टूबर को अपने आदेश जारी किए थे। खट्टर सरकार ने स्वयं 29 अक्टूबर 2018 को सर्कुलर जारी कर सभी अधिकारियों की सम्पति का ब्यौरा ऑन लाईन करने का निर्णय लिया था।
आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने बताया कि उन्होंने 16 दिसम्बर 2009 को चीफ सैक्रेटरी आईएएस, आईपीएस, एचसीएस, एचपीएस व राजपत्रित अधिकारियों की सम्पति का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की थी। मामला नौ वर्षों तक लटका रहा। प्रदेश सरकार से 29 अक्टूबर 2018 को इस मुद्दे पर सहमति मिलने के पश्चात राज्य सूचना आयोग की फुल बैंच ने आरटीआई एक्ट 2005 के सैक्शन 25 (5) की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हरियाणा सरकार को प्रदेश के सभी अधिकारियों की सम्पति अधिकारिक पोर्टल पर सार्वजनिक करने के निर्देश 30 अक्टूबर 2018 को दिए थे। राज्य सूचना आयोग के निर्णय अनुसार 1 अप्रैल 2019 से सरकारी पोर्टल पर यह ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना था।
पीपी कपूर ने बताया कि राज्य सूचना आयोग के इस ऐतिहासिक निर्णय पर अमल बारे उन्होंने चीफ सैक्रेटरी हरियाणा व राज्य सूचना आयोग में अलग-अलग आरटीआई गत 19 जून को लगाई। इसके जवाब में हरियाणा सिविल सचिवालय सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव राकेश कुमार ने अपने 10 जुलाई के पत्र द्वारा सूचित किया कि राज्य सूचना आयोग केआदेश की अनुपालना का मामला सरकार के पास विचाराधीन है। दूसरी ओर राज्य सूचना आयोग के अवर सचिव यज्ञ दत चुघ ने भी अपने गत 4 जुलाई के पत्र द्वारा बताया कि आयोग के आदशों की अनुपालना बारे कोई पत्र सरकार से नहीं मिला।
कपूर ने आरोप लगाया कि “जीरो टॉलरेंस ” का दावा करने वाली खट्टर सरकार भ्रष्ट नौकरशाहों के दबाव के कारण अफसरों की सम्पति सार्वजनिक नहीं कर रही है। उन्होंने राज्य सूचना आयोग के फैसले व हरियाणा सरकार के अपने फैसले को तत्काल लागू कर सम्पति का ब्यौरा तत्काल वैब पोर्टल पर सार्वजनिक करने की मांग की है।

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