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उत्तराखंड का खूबसूरत गाँव रजबौ मल्ला: रास्ते ( सड़क ) के अभाव में खाली होता गया “मिनी मसूरी”

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रजबौ मल्ला जिसे लोग मिनी मसूरी के नाम से भी जानते व पुकारते है
अधिकतर लोग सेना व अध्यापक सेवा से सेवानिवृत्त व सेवारत 
उपजाऊ जमीन होते हुए भी खेती नही
पूरा इलाका चारो तरफ से जंगल से घिरा है जंगली जानवर व पशु पक्षी फसलो को नुकसान पहुंचाते है।

 

पौड़ी : सड़क के अभाव से खाली होता रिखणीखाल का रजबो गांव


पौड़ी : रिखणीखाल प्रखंड के अन्तर्गत एक ऊंचे पहाड़ी पर स्थित गांव रजबौ मल्ला जिसे लोग मिनी मसूरी के नाम से भी जानते व पुकारते है। ये गांव दो राजपूत जातियों से सम्बन्ध रखता है।नेगी और गुसाई के जनमानस यहा निवास करते है।अधिकतर लोग सेना व अध्यापक सेवा से सेवानिवृत्त व सेवारत है।

यहा की जमीन आप फोटो मे देख रहे होगे कि बंजर पडी है इतनी उपजाऊ जमीन होते हुए भी खेती नही कर रहे है क्योंकि पूरा इलाका चारो तरफ से जंगल से घिरा है तथा जंगली जानवर व पशु पक्षी फसलो को नुकसान पहुंचाते है।पहले तक इन खेतो मे आजकल के बरसाती मौसम मे धान झःगोरा मंडुवा उडद गहथ छीमी रैयास मिर्च मूला मूली भटट तोर आदि बावन प्रकार की फसले होती थी


अब पलायन भी जोर पकड़ने लगा है।इस गांव के मुख्य बाजार कोटडीसैण है।जो कि लगभग पांच किलोमीटर दूर खड़ी चढाई है अगर आदमी ने टोपी पहनी है तो सिर से नीचे गिर जाती है।बाजार की फोटो भी है।लेकिन सड़क के अभाव मे जनजीवन अस्त-व्यस्त व कठिन है।बारह साल बीत गए लेकिन लॉलीपॉप ही दिखाई दे रहे है।यहा के लोग रोजमर्रा की वस्तु खच्चर से ढुलाई करते है।वृद्ध लोग की सवारी भी खच्चर ही है।

अब अस्पताल की बात करे तो अन्दरगांव का एम्स चिकित्सालय भी दूर है।जहा डॉक्टर न होने के कारण सफाईवाला कर्मचारी या वार्ड ब्वाय डॉक्टर की भूमिका निभाते है।यहा की आबोहवा बहुत ही अच्छी है मन को मोह लेती है।

अब गाव मे कम ही लोग है लेकिन शादी ब्याह जागर देवी पूजा जकवन मरण मे सब उपस्थित रहते है।इनका सड़क का सपना पूरा नजर होता नही दिखाई देता है।यदि शासन प्रशासन इन बातो पर ध्यान दे तो तस्वीर बदल सकती है।बीमारी की अवस्था मे एम्स चिकित्सालय कैसे पहुंचा जाये।गाव मे भूपाल सिह गुसाई गबर सिंह गुसाई भारत सिंह नैगी गोपाल सिंह गूसाई ही देते है। अधिकतर पलायन हो ही गया है।

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