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तरावड़ी मे पोलीथीन के खिलाफ अभियान टांय टांय फिस

शहर मे दुकानदार व रेहड़ी वाले बड़े धड़ल्ले के साथ पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे है।

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तरावड़ी मे पोलीथीन के खिलाफ अभियान टांय टांय फिस
शहर मे दुकानदार व रेहड़ी वाले बड़े धड़ल्ले के साथ पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे है।
तरावड़ी-22 जून। (राजकुमार खुराना) पॉलिथीन और प्लास्टिक गाँव से लेकर शहर तक लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। शहर का ड्रेनेज सिस्टम अक्सर पॉलिथीन से भरा मिलता है। इसके चलते नालियाँ और नाले जाम हो जाते हैं। इसका प्रयोग तेजी से बढ़ा है। प्लास्टिक के गिलासों में चाय या फिर गर्म दूध का सेवन करने से उसका केमिकल लोगों के पेट में चला जाता है। इससे डायरिया के साथ ही अन्य गम्भीर बीमारियाँ होती हैं। तरावड़ी मे पोलीथीन के खिलाफ अभियान टांय टांय फिस होता नजर आ रहा है। तरावड़ी शहर मे दुकानदार व रेहड़ी वाले बड़े धड़ल्ले के साथ पॉलिथीन का प्रयोग कर रहे है। ज्ञात रहे पिछले महीने राष्ट्रीय हरित न्यायधिकरण के निदेंर्शो की अनुपालना करते हरियाणा सरकार ने सभी नगरपालिका के सचिवों को निर्देश दिये थे कि वह पालीथीन प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करें। लेकिन नगरपालिका तरावड़ी प्रशासन आंखें मंूदे बैठा है। प्रशासन दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही करने से कतरा रहा है। पॉलिथीन का बढ़ता हुआ उपयोग न केवल वर्तमान के लिये बल्कि भविष्य के लिये भी खतरनाक होता जा रहा है। पॉलिथीन पूरे देश की गंभीर समस्या है। पहले जब खरीदारी करने जाते थे तो कपड़े का थैला साथ लेकर जाते थे, किन्तु आज खाली हाथ जाकर दुकानदार से पॉलिथीन माँगकर सामान लाते हैं। पहले अखबार के लिफाफे होते थे किन्तु उसके स्थान पर आज पॉलिथीन का उपयोग किया जा रहा है। पॉलिथीन की पन्नियों में लोग कूड़ा भरकर फेंकते हैं। कूड़े के ढेर में खाद्य पदार्थ खोजते हुए पशु पन्नी निगल जाते हैं। ऐसे में पन्नी उनके पेट में चली जाती है। बाद में ये पशु बीमार होकर दम तोड़ देते हैं। प्लास्टिक और पॉलिथीन गाँव से लेकर शहर तक लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। शहर का ड्रेनेज सिस्टम अक्सर पॉलिथीन से भरा मिलता है। इसके चलते नालियाँ और नाले जाम हो जाते हैं। इसका प्रयोग तेजी से बढ़ा है। कई जगह पॉलिथीन पर प्रतिबन्ध है, बावजूद इसके दुकानदार चोरी-छिपे पॉलिथीन का प्रयोग करते पाये जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्यों नहीं सफल होता है पॉलिथीन पर प्रतिबन्ध? पर्यावरण एवं स्वास्थ्य दोनों के लिये नुकसानदायक 40 माइक्रॉन से कम पतली पॉलिथीन पर्यावरण की दृष्टि से बेहद नुकसानदायक होती है। चूँकि ये पॉलिथीन उपयोग में काफी सस्ती पड़ती हैं, इसलिये इनका उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। लेकिन इन्हें एक बार उपयोग करने के बाद कूड़े में फेंक दिया जाता है, जबकि इससे अच्छे किस्म की खाद बनाई जा सकती है तथा अन्य काम भी किये जा सकते हैं। इसके इलावा शहर की सामाजिक व धार्मिक संस्थायें पालीथीन रोकने के लिये समाज मे लोगों को जागरूक करे।
बाक्स
नगरपालिका सचिव पवित्र गुलिया का कहना है कि स्टाफ की कमी होने की वजह से पालीथीन के प्रयोग की दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही नही हो पाई। लेकिन सोमवार सारा सटाफ आ जायेगा और शहर मे जाकर पालीथीन प्रयोग करने वालों दुकानदारों और रेहड़ी वालों के चालान काट कर जुर्माना किया जायेगा।

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