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हरियाणा का रण 2019: क्षेत्रीय दलों का खाता खुलना मुश्किल ? मुख्य मुकाबला कांग्रेस-भाजपा में

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  • क्षेत्रीय दल अपना खाता इस चुनाव में खोल पाएंगे इस में संदेह
  • क्षेत्रीय दलों जेजेपी , लोसुपा और अन्य की चिंताएं बढ़ाने वाला चुनाव
  • लोसुपा और बसपा गठबंधन के नेता पर आरोप, कर लिया खुद ही लोकसभा चुनाव से पलायन 

चंडीगढ़। हरियाणा में चुनाव मैदान में उतरे सभी राजनैतिक दल प्रदेश की सभी 10 की 10 सीटें जितने का दावा कर रहे हैं l ज्यूँ ज्यूँ चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ रही है एक बात शीशे की तरह साफ होती जा रही है कि प्रदेश का मतदाता सभी दावों को झुठला देगा l क्षेत्रीय दल अपना खाता इस चुनाव में खोल पाएंगे इस में संदेह बना हुआ है l लोकसभा चुनाव में हरियाणा में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी में होने के आसार हैं जिससे क्षेत्रीय दलों जेजेपी , लोसुपा और अन्य की चिंताएं बढ़ाने वाला चुनाव हो सकता हैं l

शुरूआती दौर में सबसे पहले उम्मीदवार मैदान में उतार कर बीजेपी बढ़त बनाती दिख रही थी l उस समय दूसरे दलों के उम्मीदवार मैदान में ना होने से ऐसा लगने लगा था कि हरियाणा में बीजेपी के पक्ष में एकतरफा माहौल है l लेकिन दूसरे दलों के उम्मीदवार मैदान में आने के बाद राजनैतिक तस्वीर साफ़ होने लगी l पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सोनीपत से नामांकन के बाद हरियाणा की राजनीती ने तेज़ी से पलटी खाई है l एक तो कांग्रेस पार्टी में उनका कद, दबदबा और रुतबा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया, वहीँ हुड्डा के इस कदम से जनता का भरोसा भी कांग्रेस के पक्ष में बढ़ता दिखाई दे रहा है l

राजनैतिक समीक्षक मानते हैं कि हरियाणा प्रदेश में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी में ही होगा और हार जीत भी इन्ही पार्टियों के बीच होनी तय मानी जा रही है l इसका मुख्य कारण इनेलो का बिखराव माना जा रहा है l क्यूंकि इनेलो के बंटवारे से पहले जो माहौल था उसमे इनेलो कांग्रेस पर भारी दिखाई देती थी l दुष्यंत के अलग दल जेजेपी के गठन के बाद इनेलो की ताकत एक चौथाई भी नहीं बची वहीँ जेजेपी को अभी खुद को साबित करना बाकी है l राजनैतिक पंडित मानते हैं कई स्थानों पर जेजेपी-आप, इनेलो, लोसुपा-बसपा का अच्छा खासा प्रभाव हैं जो बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों की हार जीत में काफी असर दिखा सकता हैं l

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जींद विस उपचुनाव में जेजेपी ने खुद को साबित करने का बेहतर प्रयास किया उसके बाद जेजेपी को राजनीति में कुछ दमखम की पार्टी के रूप में मान्यता तो मिल गई लेकिन लोगों का मानना है कि जेजेपी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलना साबित करता है कि ओमप्रकाश चौटाला के विरोध को दरकिनार कर जेजेपी लोकसभा चुनाव में कोई बड़ा करिश्मा कर पायेगी ? इसमें संदेह बना हुआ है l क्यूंकि जींद में जेजेपी ने अपना सबसे बेस्ट उम्मीदवार और पूरी ताकत झोंक रखी थी फिर भी ओमप्रकाश चौटाला की कमी नतीजों में साफ़ साफ़ देखी गई l

रही बात लोसुपा और बसपा की तो इस गठबंधन के नेता पर आरोप लग रहे हैं की उन्होंने खुद ही लोकसभा चुनाव से पलायन कर लिया l कभी कहते थे पूर्व सीएम हुड्डा के खिलाफ चुनाव लडूंगा, लेकिन अंतिम समय में नामांकन भी नहीं किया l कागजों का बहाना किसी के गले नहीं उत्तर रहा l किसी ने पहली बार चुनाव लड़ा हो तो मान लेंगे कि कागजों की जानकारी न रही हो, लेकिन जो सख्श वर्षों से चुनाव लड़ रहा हो वह ऐसी गलती अनजाने में नहीं कर सकता l

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