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जज्बा दोस्ती का: सहेली को बचाने कुएं में कूद गई इंदिरा, दो घंटे कंधे पर बिठाकर लटकी रही रस्सी से

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आसींद।रघुनाथपुरा में बकरियों को पानी पिलाने गई एक बालिका बकरी समेत कुएं में गिर गई। उसे बचाने के उसकी सहेली इंदिरा ने भी कुएं में छलांग लगाने में देर नहीं की। दोनों सहेलियों हिम्मत नहीं हारी और कुएं में रस्सी के सहारे लटकी रही। बालिका को कंधे पर बैठाकर इंदिरा करीब दो घंटे तक रस्सी से लटकी रही। पता चलने पर गांववालों ने दोनों को बाहर निकाल लिया। रस्सी पर लटके रहने के कारण दोनों के हाथ लुहलुहान हो गए। इतना ही नहीं, दोनों सहेलियों को बचाने में आठ वर्षीय बालक ने सूझबूझ का परिचय देकर दोनों की जान बचा ली।खेत पर बकरियां चरा रही गोपाललाल बलाई की 11 वर्षीय पुत्री पिंकी शुक्रवार शाम 4 बजे अपनी बकरियों को लेकर घर लौटते समय बकरियों को पानी पिलाने कुएं पर गई। पिंकी मुंडेर पर खड़ी होकर पानी खींचने लगी। इसी बीच, दिनभर की प्यासी बकरियां पानी पीने दौड़ी, तो उनकी टक्कर से पिंकी 50 फीट गहरे कुएं में जर गिरी। एक बकरी भी कुएं में गिर गई। कुएं में पांच फीट से अधिक पानी था। धमाके की आवाज सुन पास के खेत पर बकरियां चरा रही उसकी 15 वर्षीय सहेली इंदिरा खारोल दौड़कर आई। उसने बिना देर किए पिंकी को बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी।इधर, देर तक इंदिरा के नहीं लौटने पर उसके साथ आया आठ वर्षीय भाई महावीर कुएं के पास पहुंचा। कुएं के अंदर से इंदिरा के चिल्लाने की आवाज आई। महावीर ने कुएं में देखा तो इंदिरा ने ने समझाया कि बाहर पड़ी रस्सी लटकाकर एक सिरा कुएं के पाट से बांध दे।  नन्हे महावीर ने एेसा ही किया। इंदिरा ने पिंकी को कांधे पर चढ़ाया और खुद रस्सी से लटक गई। पिंकी ने भी रस्सी थाम ली। इधर, महावीर दौड़कर करीब दो मील दूर गांव में पहुंचा। उसकी सूचना पर शाम 6 बजे के ग्रामीणों ने जाकर इंदिरा, पिंकी व बकरी को बाहर निकाला। करीब दो घंटे तक रस्सी से पकड़े रखने से दोनों के हाथ लहूलुहान हो गए।  उनका पास के क्लीनिक पर उपचार करवाया…

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