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बोले जवाहर यादव: दुविधा में दो युवराज-एक भागने को तो दूसरा लड़ने को मजबूर

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लोकसभा चुनाव में हरियाणा के दो युवराजों की राजनीतिक विरासत पर मंडराया खतरा।
एक भागने को मजबूर, दूसरा लड़ने को मजबूर
इस बार के लोकसभा चुनाव में प्रदेश के कई राजनीतिक दलों के साथ साथ दो राजनीतिक घरानों के युवराजों का अस्तित्व भी दांव पर लगा है।
एक रोहतक से लोकसभा प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा और दूसरे हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला।

पहले बात दीपेंद्र हुड्डा की 

रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा के लिए चुनाव लड़ना जरूरी भी है और मजबूरी भी।जरूरी इसलिए क्योंकि कोंग्रेस हाईकमान को जवाब देना है,विधान सभा चुनाव से पहले पिता की सीएम पद की दावेदारी मजबूत करनी है और प्रदेश कोंग्रेस की कमान भी सम्भालनी है।
मजबूरी इसलिए क्योंकि कोंग्रेस ने भाजपा की टिकट से पहलें हीं घोषणा कर दी अब दुष्यंत चौटाला तो हिसार से मैदान छोड़ सकते पर रोहतक से दीपेन्द्र हुड्डा नही ।

अब बात दुष्यंत चौटाला की

ऐसा ही कुछ हाल जेजेपी के नेता दुष्यंत चौटाला का भी है।इनेलो से अलग होने के बाद जींद उपचुनाव में अपने पहले ही मुकाबले में अपने छोटे युवराज की हार का मुंह देख चुकी जेजेपी बड़े युवराज की हार नही झेल पाएगी और पार्टी का वजूद बनने से पहले ही खत्म हो जाएगा, दुष्यंत फैसला नही कर पा रहे कि पहले से सम्भावित हारे हुए खेल में दुष्यंत खुद पर दांव लगाये या फिर से दिग्विजय को चुनाव की बेदी पर बलि चढ़ा दे और ये ठीक भी है परिवारवादी पार्टी में तो एक ही युवराज होता है ।

इस बार दीपेंद्र और दुष्यन्त दोनों के लिए चुनाव की डगर बेहद मुश्किल है।पांचों नगर निगम और जींद उपचुनाव के बाद प्रदेश ना केवल मोदी के नाम की बल्कि मनोहर के काम की भी लहर है।एक ओर जहां मोदी लहर और मनोहर की नीतियों का बड़ा फायदा अरविंद शर्मा को मिलने जा रहा है,वहीं फरवरी 2016 के दंगों की आंच दीपेंद्र को झुलसा रही है वहीं उनकी चौधर की संस्कृति से मेल नही खाने वाले लोगों को हरियाणा से बाहर कर देने वाली विडीओ सभी के मोबाइल में हुड्डा परिवार को मुँह चिढ़ा रही है , दंगों का खामियाजा पूरे हुड्डा परिवार को इन लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

ऐसा ही कुछ हाल हिसार में भी है।एक ओर दुष्यन्त पर सीएम बनने की लालसा में अपने परिवार और दादा ओम प्रकाश चौटाला से गद्दारी करने के आरोप हैं वहीं दूसरी ओर हर बार ओम प्रकाश चौटाला की पैरोल चुनाव से पहलें नामंजूर और अजय चौटाला की स्वीकार करने वाली आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन पर पार्टी वर्करों में नाराजगी है।इसके अलावा बीजेपी ने यहां चौधरी बृजेन्द्र सिंह को पार्टी का टिकट देकर दुष्यन्त की बची खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।

जिस तरह पिछले कुछ चुनावों में भजनलाल और बंसी लाल की विरासत बीते जमाने की बात हो गई है ,इसी तरह इस बार इन दोनों परिवारों के लिए भी अपना अस्तित्व बचाना बड़ी चुनौती है।

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