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रेवाड़ी के झाबुआ गांव के बीहड़ में भूख और प्यास के कारण 8 से 10 गायों की मौत

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रेवाड़ी जिले के झाबुआ गांव के बीहड़ में जोकि करीब 700 एकड़ में फैला हुआ है उसमें ढाई सौ से तीन सौ बेसहारा गाय हैं जोकि भूख और प्यास के कारण त्राहि-त्राहि कर रही हैं चारा ना होने के कारण उन्होंने पेड़ों की छालो को भी खा लिया है क्योंकि बीड के चारों तरफ बाढ़ लगी हुई है जिससे कि कोई भी पशु बीहड़ के अंदर या बाहर ना जा सके। लेकिन सर्दी के मौसम में बीहढ के अंदर कोई भी चारे की व्यवस्था नहीं है क्योंकि सर्दी के मौसम में सभी पेड़ सूख चुके हैं ऐसे में करीब 8 से 10 गाय अपना दम तोड़ चुकी है और काफी गायों को जोकि बेसुध होकर गिर जाती हैं उन्हें नोच नोच कर आवारा कुत्ते खा रहे है। ग्रामीण युवाओं ने ऐसे पशुओं को इलाज के लिए बाहर की गौशाला में भेजा है जिससे कि उनका उपचार समय पर हो सके। 
गांव झाबुआ, खिजूरी और बाधोज गांव के युवाओं को जब पता चला कि गायों की ऐसी दुर्दशा बीहड में हो रही है तो उन्होंने अपने बुजुर्गों से स्थिति के बारे में बताया और ग्रामीणों की सलाह पर घर घर से चारा इकट्ठा कर पिछले करीब 20-25  दिन से युवा गायों की सेवा में लगे हुए हैं। लेकिन सरकार व प्रशासन ऐसे पशुओं की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि गायों के लिए अच्छी व्यवस्था की जाए और इन गायों को वर्तमान में जारी किसी गौशाला में भेजा जाए या इनकी कोई और अच्छी व्यवस्था की जाए जिससे कि इनकी जान बच सकें। गांव से सत्येंद्र झाबुआ, दया पहलवान, उमेश खजूरी, बाबूलाल पंडित, दिलीप, सोनू, मोनू बाधोज, राहुल, अनूप, शेर सिंह, परमाल, हुकम, भीमा राम सहित अनेक लोग गौ सेवा में लगे हुए हैं।
इनके साथ सभी गांव वासियों की मांग है कि जल्द से जल्द गौ माता की रक्षा के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समाचार पत्रो और टीवी चैनलो के माध्यम से प्रचार में गौ माता के नाम पर ढकोसला किया जा रहा है। लेकिन सरकार का गायों के प्रति कोई ध्यान नहीं। ग्रामीणों की मांग की सभी गायों को किसी गौशाला में भिजवाया जाए। 
बाईट्स : सतेंद्र झाबुआ : ग्रामीण युवा। 
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