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चुनावी बजट होते हुए भी किसी भी वर्ग को कोई विशेष राहत नहीं : प्रो. सम्पत सिंह

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चण्डीगढ़ 25 फरवरी  पूर्व मंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 का बजट चुनावी बजट होते हुए भी किसी भी वर्ग को कोई विशेष राहत नहीं दे पाया। बजट में वित मंत्री ने किसी नई योजना या परियोजना का ऐलान नहीं किया उनका पूरा जौर पुरानी योजनाएं गिनाने में रहा। इस बजट परिव्यय में 37924.09 करोड़ रू. के पुंजीगत व्यय दिखाया गया है जबकि कहा ये गया है कि कुल बजट में से 46562.37 करोड़ रू. प्रदेश में क्रियान्वित किये जा रहे 15 स्तत विकास लक्ष्यों से सम्बिधत योजनाओं के लिये आबंटित किये गये है अर्थात् आने वाले वित्तीय वर्ष में नई योजना शुरू करना तो दूर की बात है पुरानी योजनाएं पुरी करने में भी लगभग 9000 करोड़ रू. की कमी रह जायेगी।
उन्होंने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले राज्य सरकार की ऋण देनदारी जहां 22.9 प्रतिशत पहुॅच गई है जोकि वित्तीय वर्ष 2014-15 में 16.2 प्रतिशत थी। सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ोतरी जहां 2015-16 में 11.5 प्रतिशत थी, इस वर्ष घटकर केवल 8.2 प्रतिशत रह गई है। कर्ज व अन्य गैर पूंजीगत भुगतान में लगभग 70 प्रतिशत बजट खर्च हो जायेगा जोकि वित्तीय कुप्रंबधन को दर्शाता है। पुंजी पर लागत खर्च वित्तीय वर्ष 2015-16 में 32 प्रतिशत था जोकि अब घटकर 29 प्रतिशत रह जायेगा। जिसकी वजह से बिजली, सिंचाई, कृषि, स्वास्थ्य, पीने के पानी की आपूर्ति व उद्योग पर पूंजी लागत घटेगी।
उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में वोट लेने के लिये 1500 करोड़ रू. किसानों व असंगठित क्षेत्र में लगे श्रमिकों के परिवारों के लिये बजट में घोषणा तो की है हालांकि इसके लिये प्रतिमाह कितनी राशि पेंशन दी जायेगी इसे नहीं बताया। उन्होंने कहा कि किसानों, श्रमिकों, दस्तकारों व छोटे व्यापारियों की कर्ज माफी की मांग एक तृष्णा बनकर ही रह गई। लाखों कर्मचारियों को भी अपनी वेतन विसंगतियां दूर करवाने, अनुबंधित, दैनिक वेतनभोगी व तदर्थ कर्मचारियों की पक्का होने की आशाओं पर भी इस बजट ने पानी फेर दिया गया है।
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