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134 A के तहत दाखिलों पर आशंका के बादल- वर्षों से बकाया है करोड़ों, सरकार नहीं कर रही फीस का भुगतान

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नियम 134ए के तहत पिछले कई वर्षों का तत्काल भुगतान करे सरकार-कुंडू
-प्राइवेट स्कूल संघ ने इस बार फ्री में दाखिला न देने की दी चेतावनी
-स्कूल स्तर पर किए गए दाखिलों की फीस का भुगतान करने की भी उठाई मांग

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ ने सरकार से पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों में नियम 134ए के तहत पढ़ रहे गरीब बच्चों की फीस का भुगतान करने की मांग को उठाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपने वादे के अनुरूप निजी स्कूलों को उक्त नियम के तहत दाखिल बच्चों की फीस का भुगतान नहीं किया तो अपै्रल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में वे इस नियम के तहत बच्चों को दाखिला नहीं देंगे। इसके साथ ही संघ ने स्कूल स्तर पर दाखिल किए गए गरीब बच्चों की फीस का भुगतान करने की मांग को भी प्रमुखता के साथ उठाया है।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू व जिलाध्यक्ष रविंद्र नांदल

ने कहा कि सरकार के आदेशों के अनुरूप प्राइवेट स्कूल संचालक नियम 134ए के तहत पिछले कई वर्षों से गरीब बच्चों को अपने स्कूल में पढ़ा रहे हैं। सरकार व प्राइवेट स्कूल संघ के बीच कई दौर की बातचीत में इन बच्चों की फीस दिए जाने की मांग भी समय समय पर उठाई जाती रही है। लेकिन सरकार बच्चों को दाखिला कराने के बाद प्राइवेट स्कूलों की उक्त मांग पर चुप्पी साध लेती है।

 

बहानेबाज़ी छोड़े सरकार

अब सरकार यह बहाना बना रही है कि निजी स्कूल संचालक नियम 134ए के तहत दाखिल बच्चों की फीस की डिमांड ही नहीं कर रहे। जबकि हकीकत यह है कि हर वर्ष शिक्षा विभाग के पास निजी स्कूल संचालक बकायदा प्रफोर्मा भरकर यह जानकारी देते रहे हैं कि गरीब बच्चों के दाखिले की कितनी सीटें भरी गई और कितनी सीटें खाली है। ऐसे में सरकार का बहाना तर्कसंगत नहीं है और अगर सरकार की नियत ठीक है तो विभाग में मौजूद रिकॉर्ड को देखते हुए प्राइवेट स्कूलों को तुरंत पैसा जारी करे।

 

नए शैक्षणिक सत्र में  नियम 134ए के तहत दाखिला नहीं

नए शैक्षणिक सत्र में प्राइवेट स्कूल संचालक किसी भी बच्चे को नियम 134ए के तहत दाखिला नहीं देंगे। वहीं अपने स्तर पर गरीब बच्चों को जरूर पढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक 9वीं से 12वीं कक्षा तक के ऐसे बच्चों के लिए कोई पैसा निर्धारित नहीं किया है, जबकि प्राइमरी के लिए 300 रूपए और मिडल के लिए 500 रूपए निर्धारित हैं। यह पैसा भी कई वर्षों से जारी नहीं किया गया। ऐसे में प्राइवेट स्कूलों का करोड़ों रूपए बकाया है।

उन्होंने कहा कि प्राइवेट स्कूल सरकार का हर कदम पर सहयोग करते आ रहे हैं और बेरोजगारी के इस दौर में लाखों युवाओं को भी रोजगार मुहैया कराते हुए बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रहे हैं। इससे प्रदेश का नाम रोशन हो रहा है। इसलिए सरकार को भी अपने किए गए वादे के अनुरूप प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चों की फीस जारी की जानी चाहिए।

134 A के तहत दाखिल किये गए बच्चों का तमाम ब्यौरा

उन्होंने स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए बनाए गए कठोर नियमों को सरल करने व वर्ष 2007 से पहले के सभी अस्थाई व एग्जिस्टिंग स्कूलों को स्थाई मान्यता देने की मांग को भी प्रमुखता के साथ उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने घोषणा पत्र में उक्त मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन करीब पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं किया गया।

उन्होंने मांग की कि नियमों में सरलीकरण करते हुए ऐसे स्कूलों को जल्द से जल्द मान्यता दी जाए तथा शिक्षा विभाग के पास जमा सूचना के आधार पर नियम 134ए के तहत दाखिल एवं स्कूल स्तर पर दाखिल किए गए गरीब बच्चों की फीस का जल्द से जल्द भुगतान किया जाए।

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