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धक्काशाही : छात्राओं के आंदोलन से घबराया प्रशासन, टेंट उखाड़ा फाड् डाले बैनर

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हरियाणा में एक कहावत है कि ” ठाडा मारै रोवण दे ना, खाट (चारपाई ) खास ले सोवण दे ना ! कहावत भले हरियाणवीं में है पर लागु सारी दुनियां में होती है। इसी कहावत को चरितार्थ करती एक घटना महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले के पुंताम्बा गांव में सामने आई। घटना की मिली जानकारी के अनुसार गाँव के किसान परिवारों से जुडी तीन छात्राओं ने किसानों से जुडी मांगों को लेकर छह दिन पहले भूख हड़ताल शुरू की थी। जिसे आस पास के क्षेत्र में लोगों का भारी समर्थन मिलता देख शासन प्रशासन की साँसे फूलने लगी और रात के अँधेरे में तड़के तीन बजे पुलिस की टीम ने आंदोलन के लिए लगाए गए शामियाने, बैनर और पोस्टरों को उखाड़ फेंका, क्योंकि स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि वे अवैध रूप से लगाए गए हैं। लड़कियों के साथ प्रदर्शन कर रहे रिश्तेदारों व समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया, जबकि वहां मौजूद bahut सारे समर्थकों को खदेड़ दिया गया।
पुलिस की इस कार्रवाई से गुस्साए पुंताम्बा ग्रामीणों ने स्वस्फूर्त बंद आयोजित किया और 19 वर्षीय शुभांगी जाधव सहित शुक्रवार को अस्पताल ले जाई गईं लड़कियों को तुरंत रिहा करने की मांग की। गांव में बीते तीन दिनों के दौरान यह दूसरा बंद है। रालेगण सिद्धि में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की सप्ताह भर चली भूख हड़ताल के बाद इन तीन लड़कियों की भूख हड़ताल को कई किसान समूहों, सत्तारूढ़ सहयोगी शिवसेना और विपक्षी कांग्रेस व अन्य दलों का समर्थन प्राप्त था।

निकिता, शुभांगी और पूनम के साथ-साथ उनके कॉलेज सहपाठियों व दोस्तों ने सभी कृषि ऋण माफ करने, कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी किसानों के लिए पेंशन और कृषि उद्देश्यों के लिए मुफ्त बिजली सहित किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर चार फरवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
छह फरवरी को पुंताम्बा गांव में स्कूली छात्राओं और ग्रामीणों ने काले झंडे के साथ जुलूस निकाला था, जिसमें पड़ोसी गांवों के लोगों की भागीदारी देखने को मिली थी। ऐसी खबरें हैं कि लड़कियों को कथित रूप से उनकी मर्जी के खिलाफ आईसीयू में रखा गया है, लेकिन उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखा हुआ है।

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