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विद्यार्थियों से डिजिटल माध्यम से रूबरू हुए मोदी
देशभर के विश्वविद्यालयों से आए सवालों के जवाब दिए
जम्मू। एसकेआईसीसी श्रीनगर में रविवार को हुए समारोह में प्रधानमंत्री डिजिटल लाइव से देशभर के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों और कालेजों के विद्यार्थियों के सवालों के जवाब दिए।  एक सवाल में कि आप जो प्रयास कर रहे हैं उनमें कितना संतोष है, के जवाब में मोदी ने कहा कि हम सही दिशा में एक टाइम टेबल के साथ आगे बढ़ रहे हैं। ग्लोबल स्टेंडर्ड को पाने के उचित प्रयास कर रहे हैं।
असम यूनिवर्सिटी के डिजिटल इंडिया के एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि हम रोजमर्रा की जिंदगी में डिजिटल इंडिया के उपयोग को देख रहे हैं। नए नवाचार ने मानव जीवन को बदला है। प्रौद्योगिकी में नई छलांग लगाई गई है। डिजिटल वर्ल्ड ने दुनिया में क्रांति लाई है। आज हमने देश के 120 करोड़ लोगों का डाटा डिजिटल के माध्यम से पा लिया है। डिजिटल वर्ल्ड शरीर का एक हिस्सा बन गया है। लेकिन इसका मानव कल्याण के लिए इस्तेमाल सुनिश्चित बनाया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ी है। डिजिटल से गरीबों तक शिक्षा पहुंचाई जा सकती है।
कुरुक्षेत्र हरियाणा से गौरव के सवाल गरीबी कैसे दूर होगी, के जवाब में मोदी ने कहा कि अगर देश तय कर ले कि गरीबी से मुक्त होना है तो उसे पाया जा सकता है। देशवासियों में इसके लिए सामर्थ्य है। भारत तेजी से गरीबी से बाहर निकल रहा है। इसमें एसटी, मुसलमान तेजी से गरीबी से बाहर आ रहे हैं। देश स्वच्छता के क्षेत्र में संतोषजनक आगे बढ़ा है। 2014 में रुरल सेनिटेशन 38 फीसदी था जो आज 98 फीसदी तक पहुंच गया है। वर्ष 2014 में 40 फीसदी तक गरीबों ने बैंक खाते खोले थे जो आज लगभग 100 फीसदी तक खुल गए हैं। गरीबी से निकलने के लिए गरीबों को सशक्त बनाना होगा।
ओडिशा से अंकिता कुंजू के पर्यटन पर पूछे सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि देश में पर्यटन की अपार क्षमता है। लेकिन पर्यटन और धरोहर स्थलों को लेकर हमें पहले उन पर गर्व करना होगा। पर्यटन आर्थिक स्तर पर देश को मजबूत बनाता है। उबर की तरह युवा ऐसे एप विकसित करें जिसमें पर्यटन को आगे लाने की क्षमता हो।
गुजरात के विजय कुमार के किसानों के लिए कहां से पैसे लाएगी सरकार, के सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि देश में संसाधनों की कमी नहीं है। पहले एक रुपया निकलता था 25 पैसे आते थे, लेकिन अब 100 पैसे पहुंच रहे हैं। किसानों को अगले दस साल में साढ़े सात लाख करोड़ रुपये मिलेंगे।

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