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 स्वाइन फ्लू से महिला की मौत, दाह संस्कार में गए चार लोग और आए चपेट में

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सिवानी मंडी निवासी 35 वर्षीय महिला संतोष की हुई मौत
– पिछले कई दिनों से चल रहा था मेदांता में इलाज
– अस्पताल द्वारा पैक करके भेजी गई थी डेडबॉडी, ग्रामीणों ने खोलकर किया संस्कार
– संस्कार के दौरान चार लोग आए चपेट में, सैंपल जांच के लिए भेजे
– सूचना के बाद नागरिक अस्पताल से गई स्वास्थ्य विभाग की टीम

हिसार। सर्दी के चलते स्वाइन फ्लू भी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। स्वाइन फ्लू की चपेट में आई सिवानी मंडी निवासी 35 वर्षीय महिला संतोष पत्नी प्रेम की दो दिन पहले मौत होने का समाचार है। खास बात यह है कि अस्पताल द्वारा उसकी डेडबॉडी को पैक करके भेजा गया था, लेकिन ग्रामीणों द्वारा उसे खोलकर संस्कार किए जाने के चलते चार लोग और चपेट में आ गए। फिलहाल उनका इलाज अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में चल रहा है और उनके सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। दूसरी ओर सूचना मिलने पर नागरिक अस्पताल की टीम ने भी क्षेत्र का दौरा किया और लोगों को इससे बचने के लिए उपाय बताने के साथ-साथ टेमी फ्लू दवा का वितरण भी किया।
जानकारी के अनुसार करीब 35 वर्षीय संतोष का इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। उसे स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। इलाज के दौरान करीब 2 दिन पहले उसने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन द्वारा उसकी डेडबॉडी को पैक करके भेजा गया, लेकिन ग्रामीणों द्वारा संस्कार पूरी रस्म क्रिया के साथ करने की परंपरा के चलते उसे खोल लिया गया। संस्कार के दौरान स्वाइन फ्लू के संक्रमण के कारण संस्कार में भाग लेने वालों में से चार लोग इसकी चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति को तो वहीं मौके पर ही जुकाम की शिकायत हो गई थी। उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में दाखिल कराया गया है और उनकी जांच के लिए सैंपल लैब भेजे गए हैं।

जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों का आंकड़ा हुआ 14
जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों का आंकड़ा अब 14 पर पहुंच गया है। हालांकि संतोष सिवानी कस्बा निवासी थी, जो भिवानी जिले का हिस्सा है, लेकिन हिसार नजदीक होने के कारण वहां के अधिकांश लोग अपना इलाज कराने के लिए हिसार ही आते हैं। इससे पहले 29 जनवरी को धांसु गांव निवासी राजपाल की 10 माह की बच्ची चेतना की मौत हुई थी। राजपाल फौज में नौकरी करता है। इसके अलावा जिले में स्वाइन फ्लू संदिग्धों की संख्या में 180 को पार कर चुकी है।

तीन कैटेगेरी का होता है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू तीन कैटेगेरी का होता है। सी कैटेगेरी के मरीजों के लिए हाई रिस्क होता है

कैटेगेरी ए के लक्षण:
खांसी, जुकाम, खरास और हल्का बुखार लक्षण हैं। इस कैटेगेरी के मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की कोई जरूरत नहीं होती। टेमीफ्लू दवा दी जाती है।

बी कैटेगेरी के लक्षण:
तेज बुखार, खांसी, जुकाम, खरास का होना। इस कैटेगेरी के मरीजों की देखभाल करने की जरूरत होती और इन्हें भी टेमी फ्लू की दवा दी जाती है।
सी कैटेगेरी के लक्षण:
सीने में दर्द, बलगम में खून, सांस में तकलीफ, तेज बुखार, बीपी कम होना। यह कैटेगेरी सबसे खतरनाक होती है। इस स्टेज पर मरीज को अस्पताल में भर्ती करना होता है। मरीज के अलावा उसके संपर्क में आने वाले लोगों को भी टेमी फ्लू की दवा दी जाती है।

स्वाइन फ्लू के बचाव के उपाय
स्वाइनफ्लू एक संक्रमित रोग है। एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। मरीज को खांसते या छींकते समय मुंह पर रुमाल रखना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें और मास्क का इस्तेमाल करें। साबुन से अच्छी तरफ से बार-बार हाथ धोएं। ज्यादा भीड़ वाली जगह पर न जाएं, उचित मात्रा में पानी पीएं। स्वाइन फ्लू की आशंका होने पर स्कूल में या खेलने न जाए तुरंत नजदीकी चिकित्सक से सलाह लें।  

ठंड में रहता है स्वाइन फ्लू वायरस का व्यापक असर
ठंड में स्वाइन फ्लू के वायरस का व्यापक असर रहता है। ठंड कम होने के साथ ही जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, उसके बाद ही इसका वायरस कम होता जाता है। पिछले दिनों पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में भी ठंड बढ़ गई, जिस कारण स्वाइन फ्लू संदिग्ध मरीजों की संख्या कम होने की बजाय बढ़ने लगी।

लोगों को रूढ़िवादिता छोड़कर निर्देशों का पालन करना चाहिए। अस्पताल ने डेडबॉडी पैक करके दी है तो कुछ सोचकर ही दी है, इसलिए उसे खोलना नहीं चाहिए था। यदि स्वाइन फ्लू मरीज की डेडबॉडी पैक करके दी जाए तो उसे न खोलें और उसका ज्यों का त्यों संस्कार करें। फिलहाल सर्दी का मौसम है, जिसमें स्वाइन फ्लू के कीटाणु बरकरार रहते हैं।  
– डॉ. सुरेश कौशिक, एडिशनल सीनियर मेडिकल ऑफिसर, हिसार।

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