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राजस्थान

4 बेटियों का पिता जो पिछले 8 वर्ष से जकड़ा हुआ जंजीरों में

संत्री से लेकर मंत्री तक के द्वार, सहायता के लिए दर-दर भटक रही है नरेश देवी

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सरकार कर रही है गरीबों को अनेक मुहिमों के माध्यम से लाभ पहुंचाने के दावे, परंतु धरातल पर सबकुछ साफ

अपने परिवार के भरण-पोषण व लालन-पालन के लिए मेहनत-मजदूरी कर रही है नरेश देवी

सूरजगढ़ (प्रिंस लांबा)। जब एक व्यक्ति ठीक से सोच नहीं पाता, उसका अपनी भावनाओं और व्यवहार पर काबू नहीं रहता, तो ऐसी स्थिति में इन मानसिक रोगियों को तिरस्कार, हीन भावना की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसा ही हुआ है राजस्थान के झूंझूनू जिला के सूरजगढ़ क्षेत्र के अधीन आने वाले गांव जाखोद में एक व्यक्ति के साथ जो पिछले लगभग 8 सालों से जंजीरों में जकड़ा हुआ है। जाखोद निवासी जोकर मेघवाल कमजोर मानसिकता के चलते पिछले 8 वर्ष से जंजीरों में जकड़ा अपना जीवन काट रहा है। ऐसे में क्या प्रदेश क ी सरकारों व आला-अधिकारियों का कोई फर्ज नहीं बनता कि वे इस तरह के गरीब परिवार के मानसिक रोगियों का ईलाज करवाकर उन्हें बेहतर जीवन प्रदान करें ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशी से रह सकें।

 

 

जोकर की मानसिक स्थिति बिगडऩे के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उसकी पत्नी नरेश देवी पर आ गई। और तो और नरेश देवी भी बचपन में बिमारी के चलते अपनी एक आंख गवा चुकी है। परंतु फिर भी एक घरेलु महिला होने के नाते नरेश देवी के लिए यह परिस्थिति किसी भयानक स्वप्र से कम नहीं है। साथ ही घर में चार-चार जवान बेटियां होने के कारण वह मेहनत-मजदूरी करने के लिए भी कहीं घर से दूर नहीं जा सकती। लेकिन वह अपने परिवार के भरण-पोषण व लालन-पालन के लिए मेहनत-मजदूरी कर रही है जिससे केवल घर ही चल रहा है, उसके पति का इलाज नहीं।

 

 

जानकारी के मुताबिक नरेश देवी की शादी जाखोद गांव निवासी जोकर मेघवाल के घर करीब 20 वर्ष पहले हुई थी। उस समय जोकर मजदूरी करके अपना घर-परिवार चला रहा है था। परंतु शादी के 4 साल बाद ही उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ी गई और बिगड़ते-बिगड़ते वह इन हालातों में पहुंच गया कि 8 वर्ष पहले वह लोगों के साथ मारपीट करना व पत्थर मारने लगा। जिससे परेशान होकर घरवालों ने उन्हें जंजीरों से बांध दिया। अब वह पिछले 8 वर्ष से जंजीरों में जकड़ा हुआ है। नरेश देवी अपने पति का इलाज करवाने व परिवार की सहायता के लिए पिछले काफी समय से संत्री से मंत्री व अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि के द्वार दर-दर ठोकरे खाती फिर रही हैं। गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अनेक मुहिम चलाकर गरीब परिवारों की सहायता करने व लाभ पहुंचाने के दावे तो करती है परंतु धरातल पर सबकुछ साफ है। तो उनकी बेटियां भी रो-रोकर सिर्फ एक ही गुहार लगा रही हैं कि उनके पिताजी का ईलाज करवाया जाए। लेकिन इस बेबस व गरीब परिवार की सुनने व सुध लेने वाला कोई नहीं है?

 

ऑनलाईन भास्कर प्रशासन के साथ-साथ आमजन से भी अपील करता है कि सभी को आगे आकर इस तरह के गरीब परिवारों की सहायता करनी चाहिए ताकि वे भी अपना जीवन खुशहाली से व्यतीत कर सकें।

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