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सूअरों की बीमारी स्वाइन फ्लू बनी मानव पर कहर:10 दिन में आठ की मौत

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स्वाइन फ्लू से संक्रमित 15 मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती !
295 सैंपल में से 39 सैंपल पाए पॉजिटीव
सूअरों की इस बीमारी ने वर्ष 2009 से इंसानों को चपेट में लेना शुरू किया था

भिवानी/ हिसार। स्वाइन फ्लू कि बीमारी भिवानी व आसपास के गाँवों , हिसार, हांसी शहर में स्वाइन फ्लू वायरस ने अपने पांव पसार लिए हैं। भिवानी के गाँव लेघां के मरीज संजय की मौत हिसार के निजी हस्पताल मे होने बीमारी से हिसार में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या पिछले दस दिन में 8 तक पहुँच गई। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कम से कम एक दर्जन के करीब मरीज अब भी शहर के अलग-अलग निजी हॉस्पिटल में इलाज करवा रहे हैं।

स्वाइन फ्लू और उसके लक्षण
जाने माने चिकित्स्क डॉ. आज़ाद सिंह हुड्डा ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक तरह का संक्रामक रोग है, जो सांस के जरिए फैलता है। स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीज जब छींकता है या खांसता है तो वायरस हवा में फैल जाते हैं और आसपास के लोगों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। संक्रमित होने के एक सप्ताह बाद इसके लक्षण नजर आते हैं। पहले यह बीमारी सिर्फ सूअरों में पाई जाती थी, लेकिन इसने इंसानों को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। स्वाइन फ्लू मरीज के श्वसन तंत्र को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को तेज बुखार होना, ठंड लगना, गला खराब होना, मांसपेशियां व सिर में तेज दर्द होने के लक्षण पाए जाते हैं। इसके अलावा शरीर में कमजोरी होना भी इस बीमारी का लक्षण है। कमजोर व्यक्ति व गर्भवती महिलाओं को यह सबसे ज्यादा फैलता है।

अब तक इन मरीजों की हुई मौत

भिवानी के गाँव लेघां के 31 वर्षीय संजय
गांव बास वासी 50 वर्षीय कृष्णा देवी
सैनियान मोहल्ला वासी 42 वर्षीय ललिता देवी
गांव मदनहेड़ी वासी 29 वर्षीय रीतू रानी
गांव मिर्जापुर वासी 55 वर्षीय बजरंग लाल
गांव खरड़ वासी 30 वर्षीय पवन कुमार
हांसी के हनुमान कॉलोनी वासी 45 वर्षीय महिला बंटी
सैनियान मोहल्ला वासी 50 वर्षीय बिमला

 

बचाव : चिकित्स्कीय इलाज के साथ ज्यादा से ज्यादा खाएं ” चने की बाकली”
डॉ. आज़ाद हुड्डा का कहना है कि इस बीमारी में बचाव ही मुख्य सावधानी है। डॉ. हुड्डा का ये भी कहना है कि चिकित्स्कीय इलाज के साथ ” चने की बाकली” काफी हद तक लाभकारी है, इसलिए मरीज को ज्यादा से ज्यादा ” चने की बाकली” खानी चाहिए। इससे रोग का शीघ्र निदान होने में मदद मिलती है।
सावधानी : बचाव के लिए बुखार, खांसी, जुकाम पीड़ितों से दूर रहें। इसके अलावा अगर आपके आसपास कोई छींकता है या खांसता है तो नाक व मुंह पर रुमाल रख लें। अपने हाथ-मुंह को दिन में साबुन के साथ जरूर साफ करें। बीमारी के लक्षण नजर आते ही सबसे पहले अस्पताल में टेस्ट करवाने के बाद उपचार लें। ज्यादा से ज्यादा गर्म पानी पीने की कोशिश करें। इसके अलावा आलू, चावल व दही का प्रयोग कम से कम करें।

 

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