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हिसार के गाँव जुगलान की घटना- ओनर किलिंग : बहन के हत्यारे भाई को फांसी की सजा

रिश्तों में अविश्वास को मिटाने के लिए सख्त सजा जरूरी : न्यायाधीश

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जज ने की टिप्पणी: जो कृत्य हुआ है इससे समाज व रिश्तों में अविश्वास पैदा हुआ है, जिसे खत्म करने के लिए सख्त से सख्त सजा जरूरी है
जुगलान गांव के 25 वर्षीय अशोक ने 10 फरवरी 2017 को जहर देकर की थी बड़ी बहन किरण की हत्या
-किरण ने सीसवाल निवासी रोहताश से 8 अगस्त 2015 को किया था प्रेम विवाह

हिसार। महिला विरुद्ध गंभीर अपराध स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. पंकज ने गंभीर टिप्पणी के साथ ऑनर किलिंग के एक मामले में बुधवार को दोषी को फांसी की सजा सुनाई। माननीय न्यायाधीश ने कहा कि जो रिश्तों और भरोसे का कत्ल करते हैं वो याद रखें उनके लिए फंदा इंतजार करता है। तमाम गवाहों और सबूतों के मद्देनज़र बहन के हत्यारे भाई को फांसी की सजा सुनाई।

मामला हिसार के जुगलान गांव का है। 10 फरवरी 2017 को जुगलान वासी 25 वर्षीय युवक अशोक ने अपनी बड़ी बहन किरण को जहर देकर मार डाला था। अशोक के खिलाफ आदमपुर के गांव सीसवाल वासी रोहताश की शिकायत पर सदर थाना में 14 फरवरी 2017 को आईपीसी की धारा 302, 506, 201 व 34 के तहत केस दर्ज किया गया था। करीब 22 माह तक चले इस केस में अदालत ने आरोपी अशोक को 29 नवंबर 2018 को दोषी करार दिया था। कोर्ट ने इस केस को जघन्य से जघन्य अपराध की श्रेणी में मानते हुए बुधवार को दोषी को आईपीसी की धारा 302 में फांसी की सजा, धारा 201 में सात साल का कठोर करावास व 1 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
ये था मामला
हिसार के नजदीकी गांव जुगलान की रहने वाली किरण ने आदमपुर के सीसवाल गाँव के रहने वाले रोहताश के साथ 8 अगस्त 2015 को अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। शादी के बाद किरण ने इस प्रेम विवाह को अपने घर वालों से छिपा के रखा और पढ़ाई करने जयपुर चली गई। 2017 में जब वह जयपुर से वापस लौटी तो उसके घरवाले उसके लिए रिश्ता तलाश करने लगे। किरण ने अपने भाई अशोक को रोहताश के साथ शादी करने की बात बताई। अशोक ने उसे दूसरी जाति के लड़के के साथ शादी करने पर परिवार की समाज में बेइज्जती का हवाला देकर समझाने की कोशिश की, लेकिन किरण अपने फैसले से नहीं पलटी। न्यायालय में पेश किये गए सबूतों के अनुसार अशोक ने 10 फरवरी 2017 को किरण को जहर देकर उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं अपने बचाव के लिए एक सुसाइड नोट भी किरण से लिखवा लिया।
इसके बाद उसके परिवार वालों ने आनन-फानन में किरण का अंतिम संस्कार भी कर दिया। घटना के चार दिन बाद 14 फरवरी को किरण के पति रोहताश की शिकायत पर सदर थाना में केस दर्ज हुआ था और किरण के भाई अशोक को आरोपी बनाया गया था।
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बचाव पक्ष के वकील ललित गोयत की दलील 

बचाव पक्ष के वकील ललित गोयत ने दलील दी कि लड़की की डेथ नेचुरल डेथ है। इसका कोई मर्डर नहीं किया गया। 10 फरवरी को पूरे गांव के सामने अंतिम संस्कार हुआ था, चोरी-छिपे नहीं किया गया था। 14 को इस मामले में एफआईआर हुई थी, जिसमें गवाह मुकर गया था। पूरी जांच में पुलिस यह साबित नहीं कर पाई है कि किरण की हत्या की गई है और किस तरीके से कैसे हत्या की गई है।

शिकायतकर्ता के वकील जितेंद्र कुश की  दलील 

जबकि शिकायतकर्ता के वकील जितेंद्र कुश ने दलील दी कि मौत की सूचना पुलिस को नहीं दी गई। न ही शव का पोस्टमार्टम कराया गया। आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मामले को घुमाने के लिए सुसाइड नोट लिखा गया था, जो जांच में फर्जी पाया गया। मृतका ने अंतरजातीय विवाह किया था और अपनी हत्या होने का अंदेशा पहले ही जता दिया था।

स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. पंकज ने ये की टिप्पणी
स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. पंकज ने फैसले के समय टिप्पणी करते हुए कहा कि ऑनर किलिंग ठंडे दिमाग से सोच-समझकर की गई हत्या है और यह आम टूर पर जाति से बाहर किए गए प्रेम विवाह में की जाती है। दोषी ने अपनी व अपने परिवार की झूठी शान के लिए यह हत्या की है। जात-पात का सिस्टम देश के लिए अभिशाप है और इस समय में देश को बचाए रखने के लिए ऐसे कृत्यों पर सख्त फैसले जरूरी हैं। भारत देश में जहां भाई-बहन के प्यार व बहन की रक्षा से जुड़े कई सारे त्योहार मनाए जाते हैं, वहां पर एक भाई द्वारा अपनी सगी बहन का कत्ल करना रिश्तों का कत्ल है। झूठी शान के लिए किए गए इस कृत्य से रिश्तों में अविश्वास पैदा हुआ है। इस अविश्वास को खत्म करने के लिए सख्त से सख्त सजा देना जरूरी है। जो लोग ऐसी प्लानिंग करते हैं वो यह याद रखें कि फांसी का फंदा उनका इंतजार कर रहा है।

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