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पंजाब

डीएवी स्कूल अबोहर का 46 वां वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह धूमधाम से संपन्न

मेहनत का कोई शॉर्ट कट नहीं : गंधार

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अबोहर (संजीव गांधी): एलआरएस डीएवी सीनियर सेकेंडरी मॉडल स्कूल का 46वां वार्षिक पुरस्कार वितरण उत्सव ‘पैरागौण’ स्कूल प्रांगण में आयोजित किया गया। इस अवसर पर डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी नई दिल्ली के अध्यक्ष पूनम सूरी के मुख्य सलाहकार व प्रसिद्ध शिक्षाविद प्रिंसीपल एचआर गंधार मुख्य अतिथि थे व प्रिंसीपल सुदेश गंधार इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि थी। इस अवसर पर विद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2017- 18 के मेधावी, प्रतिभाशाली व उपलब्धियों को अर्जित करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि द्वारा सम्मानित किया गया। सर्वप्रथम प्रिंसीपल स्मिता शर्मा द्वारा अकादमिक परिषद की टीम, स्कूल चेयरमैन देव मित्र आहूजा, स्कूल मैनेजर डा. उर्मिल सेठी, लोकल मैनेजिंग कमेटी के सदस्यों व डीएवी संस्थानों के अन्य प्रिंसीपलों के साथ मुख्य अतिथि एचआर गंधार व सुदेश गंधार का स्कूल के मुख्य द्वार पर बैंड धुन बजाकर व पुष्प हार पहना कर स्वागत किया गया।

समारोह का आगाज मुख्यातिथि द्वारा स्कूल ध्वज फहरा कर, सरस्वती वंदना के माध्यम से वेद मंत्रों का गायन और डीएवी गान के साथ-साथ गणमान्य व्यक्तियों द्वारा ज्ञान का दीपक प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन देव मित्र आहूजा, उनकी धर्मपत्नी वीणा आहूजा, चारु आहूजा, पंजाब जोन ‘जी’ के असिस्टेंट रीजनल ऑफिसर प्रमोद खुरसीजा, स्कूल मैनेजर प्रिंसीपल डा. उर्मिल सेठी, पंजाब ज़ोन ई की असिस्टेंट रीजनल ऑफिसर प्रिंसीपल कुसुम खुंगर, प्रिंसीपल डा. राजेश महाजन, प्रिंसीपल डा. रेखा सूद, रमेश कुमार (सिविल जज जूनियर डिवीजन अबोहर), अरुण गुप्ता (सिविल जज जूनियर डिवीजन अबोहर), मलकीत सिंह सिद्धु, अनिल विज, प्रिंसीपल सुधीर सिंह ठाकुर, प्रिंसीपल वीके मित्तल, प्रिंसीपल सुखदेव सिंह, प्रिंसीपल जीडी सैनी, महात्मा गांधी डीएवी स्कूल की प्रभारी टिंकू बाला, हैडमिस्ट्रेस अमरजीत मक्कड़, विमल ठठई, डा. आदर्श कुमार व प्रिंसीपल एसपीएस कटारिया उपस्थित थे। मुख्य अतिथि प्रिंसिपल एचआर गंधार द्वारा विद्यालय में स्थापित की गई अटल टिंकरिंग लैब का लोकार्पण भी किया गया। नई स्थापित की गई एटीएल टिंकरिंग लैब के उद्घाटन के बाद विज्ञान के क्षेत्र में स्कूल नई बुलंदियों को प्राप्त करेगा। स्कूल की प्रिंसीपल स्मिता शर्मा द्वारा मेहमानों का हार्दिक और उत्साहजनक स्वागत किया गया। विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद, विज्ञान, अलग-अलग प्रतियोगिताओं व अन्य क्षेत्रों में प्राप्त की गई उपलब्धियों और टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ की उपलब्धियों पर प्रकाश डालती हुई वार्षिक रिपोर्ट भी पढ़ी गई । प्रिंसीपल गंधार ने संबोधन में कहा कि स्वामी दयानंद व डीएवी शिक्षा लहर के प्रणेता महात्मा हंसराज द्वारा शिक्षा की लहर के तहत स्थापित किए गए डीएवी शिक्षण संस्थान आज पूरे देश में श्रेष्ठ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक मूल्यों व अनुशासन के लिए एक मिसाल के रूप में जाने जाते है। स्वामी दयानंद द्वारा उस काल में कही गई विज्ञान संबंधी बातें आज के परिवेश में शत-प्रतिशत खरी उतर रही है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेहनत का कोई शॉर्ट कट नहीं है। गंधार ने कहा कि विद्यार्थियों को सदैव ज्ञान का पिपासु बनना चाहिए व अपनी उत्सुकता को कभी भी शांत नहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन की ऊंचाइयों का शिखर दृढ़ निश्चय, लक्ष्य की स्पष्टता व समर्पण के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभिभावक अत्यंत विश्वास के साथ एक शिक्षक के पास अपने बच्चों को भेजता है व शिक्षक को उस बालक को तराशने में कभी भी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों की बेहतरीन ढंग से परवरिश व देखरेख करने की बात कही ।कार्यक्रम का आगाज विद्यार्थियों द्वारा ‘सरस्वती’ वंदना गाकर व स्वागत गीत प्रस्तुत करके किया गया। प्री-प्राइमरी के छात्रों ने ‘सेविंग एनवायरनमेंट के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक एक्शन गीत प्रस्तुत कर उपस्थिति को एक विशेष संदेश दिया। अंग्रेजी प्ले ‘द चॉइस-रीयल या वर्चुअल’ इस तथ्य पर बल देते हुए कि भावनात्मक भावनाओं के बिना उदार दुनिया की ओर अग्रसर तकनीकी उन्नतियां वास्तव में दर्शकों के लिए आँखें खोलने वाला था।प्राइमरी छात्रों द्वारा एक नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किया गया था, जिसमें बच्चों द्वारा अपने माता-पिता से उनके साथ कुछ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का अनुरोध किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस अवसर पर विद्यालय के ही कुछ शिक्षकों को अलग-अलग विषयों में उनके विद्यार्थियों द्वारा सर्वाधिक अंक प्राप्त करने हेतु-पाठ्य सहायक गतिविधियों व खेलों के क्षेत्र में उनकी अद्भुत प्रेरणादायक उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया गया। पंजाबी संस्कृति को दर्शाते हुए पंजाब का लोक नृत्य भांगड़ा व गिद्धा ने पंजाब की सांस्कृतिक छटा को खूब बिखेरा व दर्शकों पर खूब छाप छोड़ी। उत्सव राष्ट्रीय गान के साथ समाप्त हुआ।

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