Breaking News आर्टिकल ताजा ख़ास ख़बरें राजनीती हरयाणा

रोड शो हो या राहगीरी या फिर ” कनेक्ट-टू-पीपुल ” अकेले नज़र आते हैं सीएम मनोहर लाल

विधायक जहाँ सीएम के सामने बोलने में थोड़े कतरा रहे हैं , सांसद तो सरे आम और सीम के सामने ही उनकी ” लेग पूलिंग ” करने से गुरेज नहीं करते
तबादलों से लेकर नियुक्ति तक विकास के छोटे प्रोजक्ट से किसी बड़ी परियोजना तक सब का उद्घाटन सीएम के हाथों ही करवाया गया

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को बीजेपी कैडर के लोकप्रिय नेता होने के कारण मुख्यमंत्री का पद हासिल नहीं हुआ उन्हें यह पद आरएसएस के चहेते होने के कारण मिला है । वे चाहते तो बीजेपी के साथ साथ जनता के भी चहेते नेता बन सकते थे लेकिन मनोहरलाल खट्टर ने जो रास्ता चुना और जो निर्णय मुख्यमंत्री के रूप में लिए गए फैसलों से, जो थोड़े बहुत उन्हें चाहते थे वे भी उन से दूर छिटकते चले गए व उनका अकेलापन और भी बढ़ता गया ।

सत्ता सँभालने के बाद मनोहरलाल कि सरकार को दो साल तक ये समझ नहीं आया कि शुरुआत कहा से की जाये । समझ में आया तब भी जो कुछ भी करेंगे वही करेंगे की तर्ज़ पर प्रदेश के सभी 90 हलकों में विकास कार्यों कि घोषणा भी खुद ही करने की ठानी । उनकी इस कार्यप्रणाली से बीजेपी के उन नेताओ को बड़ी तकलीफ हुई जो वर्षों से बीजेपी कि राजनितिक जद्दोजहद में संघर्ष कर रहे थे वह भी जब मनोहरलाल  को कोई हरियाणा में जानता नहीं था तब ! उन्हें अपना वजूद ही खतरे में नज़र आने लगा । परिणामस्वरूप ऐसे लोग शुरूआती दौर में मन मसोस कर सीएम कि रैलियों में दिखे लेकिन जिस तरह अच्छे दिनों के इन्तजार का जो हश्र जनता का हुआ वही बीजेपी नेताओ का भी हुआ । अब हालत ये हैं कि मामला चाहे रोड शो कहो या राहगीरी का या फिर ” कनेक्ट तो पीपुल ” सीएम मनोहर लाल अकेले ही नज़र आते हैं पार्टी कैडर खास कर बड़े नेताओं ने तो उनके कार्यक्रमों से किनारा ही किया हुआ है ।

ऐसा नहीं है कि बीजेपी के विधायकों और मंत्रियों में ही सीएम के प्रति नाराजगी हो बीजेपी के सांसद तो और भी खफा नज़र आ रहे हैं । विधायक जहाँ सीएम के सामने बोलने में थोड़े कतरा रहे हैं , सांसद तो सरे आम और सीम के सामने ही उनकी ” लेग पूलिंग ” करने से गुरेज नहीं करते । इसका अहसास खुद सीएम मनोहरलाल को भी है जो गाहे बगाहे झलकता भी रहता है । सांसद राजकुमार सैनी तो जग जाहिर है राव इंद्रजीत सिंह की नाराजगी भी किसी से छिपी नहीं है ।
बीजेपी की अंदरूनी राजनीति के जानकारों का कहना है कि आरएसएस मनोहरलाल खट्टर को ” मॉस ” नेता के तौर पर स्थापित करना चाहती थी और उसी के लिए सब कुछ तबादलों से लेकर नियुक्ति तक विकास के छोटे प्रोजक्ट से किसी बड़ी परियोजना तक सब का उद्घाटन सीएम के हाथों ही करवाया गया । इसके लिए कई विकास कार्यों को लम्बा इन्तजार भी करना पड़ा । ईमानदारी के नाम पर कार्यकर्ताओं के छोटे छोटे जायज काम भी नहीं हो पाए, कार्यकर्ता हताश , निराश होकर घर बैठ गया ।
रही सही कसर बीजेपी और आरएसएस के तथाकथित अंदरूनी सर्वे ने पूरी कर दी । बताया जा रहा है कि इस सर्वे के मुताबिक 90 % विधायक व सांसद जीतने की पोजीशन में नहीं हैं । और कुछ हद तक यह सर्वे सही भी लगता है क्यूंकि सत्ता का केंद्र सीएम मनोहरलाल के इर्द गिर्द रहने से विधायकों और सांसदों का महत्व कम हुआ है . इस लिए हार से डरे सहमे अपना आशियाना ढूंढ़ रहे हैं . दूसरी पार्टियां इन्हें अपनी पार्टी में लेने को तो तैयार हैं पर टिकट का आश्वाशन वहां भी नहीं है ।


सार यह है कि बीजेपी विधायकों,सांसदों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को जितना महत्व दिया जाना चाहिए था नहीं दिया गया जिस कारण वे पार्टी और नेतृत्व से छिटक रहे हैं । पार्टी नेतृत्व के पास अब ये अंतिम वर्ष बचा है जिसमें कार्यकर्ताओं के लिए कुछ खास गुंजायश बची नहीं है । प्रदेश में नै नौकरियों के नाम पर काली खानापूर्ति भी मनोहरलाल के एकांकीपन बढ़ने का काम किया है अब जिस गति से नौकरियों के विज्ञापन प्रकाशित करवाए जा रहे हैं वो काम दो साल पहले शुरू होता तो अब तक ये भर्तियां अपने अंजाम तक पहुँच जाती . लेकिन ऐसा हो नहीं सका. अब कार्यकर्ता को विश्वास नहीं हो रहा कि इतने कम समय में भर्तियां कि जा सकती हैं । इसलिए कार्यकर्ता अब अपने विकल्प ढूंढने में लगा है ।
हालत ये हैं कि हरियाणा में भाजपा को चुनावी कम्पैन चलने के लिए स्थानीय नेताओं का घोर अकाल पड़ सकता है क्यूंकि जो कुछ प्रभावकारी नेता जो जनता में अपना कुछ रसूख रखते हैं उन्हें अपने चुनाव क्षेत्र में ही ज्यादा समय लगाना पड़ सकता है इस लिए बीजेपी का दारोमदार केंद्रीय नेताओं पर ज्यादा रहेगा . हरियाणा में तो सारा बीड़ा सीएम मनोहरलाल के कंधों पर ही रहने वाला है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *