Breaking News ताजा ख़ास ख़बरें देश बिहार राजनीती

डिनर डिप्लोमेसी से नितीश को कितना रिझा पाएंगे अमित शाह

नाश्ता व डिनर तो साथ में लेंगे, सीटों का बंटवारा टेढ़ी खीर होगा अमित शाह और नितीश के लिए
अमित शाह और नितीश की बातचीत के नतीजे बिहार कि राजनीति में जितना महत्व रखते हैं उस से भी कहीं अधिक राष्ट्रिय राजनीति में महत्व रखते हैं

पटना : अमित शाह और नीतीश कुमार का वीरवार को पटना में नाश्ता और डिनर साथ में लेंगे । राजनैतिक पंडित इस नाश्ते और डिनर के नतीजों का टकटकी लगाए लगाए इंतजार है । राजनीति के जानकारों का मानना है कि अमित शाह और नितीश की बातचीत के नतीजे बिहार कि राजनीति में जितना महत्व रखते हैं उस से भी कहीं अधिक राष्ट्रिय राजनीति में महत्व रखते हैं । दोनों दलों के बीच में पिछले कई दिनों से जो तल्खी देखी जा रही है उसे देख कर लगता नहीं कि पटना में नाश्‍ता और डिनर साथ-साथ लेने के साथ अमित शाह और नीतीश कुमार सीटों के बंटवारे का भी कोई फार्मूला तय कर पाएंगे ।

खुद भाजपा व जेडीयू नेता भी सीटों के बंटवारे को लेकर कहते हैं फ़ैसला दो बैठकों में इस तरह का निर्णय होना मुश्किल है ।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह गुरुवार को पटना आ रहे हैं. इस यात्रा के दौरान आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियों का समीक्षा करेंगे लेकिन सबसे ज़्यादा निगाहें उनके नाश्ते और रात के खाने पर होंगी जो वह बिहार में अब सहयोगी मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के साथ करेंगे. सुबह के नाश्‍ते में जहां भाजपा के कई नेता भी शामिल होंगे, वो राजकीय अतिथिशाला में होगा, वहीं रात का भोजन नीतीश कुमार के वर्तमान आवास 7, सर्कुलर रोड पर होगा. यहां भी बिहार भाजपा के कुछ गिने चुने नेता आमंत्रित हैं. लेकिन जहां तक सीटों के बंटवारे पर चर्चा का सवाल है, भाजपा और जेडीयू के नेता मानते हैं कि कोई अंतिम फ़ैसला दो बैठकों में करना बेकार है. हां, मुलाक़ात के साथ चर्चा शुरू हो जाएगी लेकिन कब तक नीतीश कुमार को उनके मनमाफ़िक सीटें दी जाएंगी ये सब कुछ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के ऊपर निर्भर करता है.

भाजपा के नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहले अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बातचीत कर अपनी असल स्थिति और नीतीश कुमार के आने के बाद की ज़मीनी स्थिति का आकलन करेंगे. उसके बाद जेडीयू कितने सीटों पर दावा पेश करता है उसका इंतज़ार किया जाएगा.

फ़िलहाल पार्टी के बिहार के अधिकांश नेताओं का मानना है कि नीतीश के साथ चलना बेहतर है. अगर नीतीश एनडीए से अलग हुए तो महागठबंधन को उसका लाभ मिलेगा. वहीं जेडीयू के नेता मान कर चल रहे हैं कि भाजपा सीटों के मामले पर जल्द अपना मन नहीं बताने वाली. उनका कहना है कि अमित शाह अगर नाश्‍ता और डिनर दोनों नीतीश कुमार के साथ करने को तैयार हैं तब उसका मतलब फ़िलहाल उनका मन नीतीश को साथ रखने का है ना कि उन्हें अलग चुनाव लड़ने के लिए मजबूर करने का.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *