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नहरी पानी का टोटा बना किसानों के लिए संकट 

राजेंद्र कुमार
सिरसा, 13 जून। हरियाणा के अंतिम छोर पर राजस्थान की सीमा से सटतेे सिरसा मेंं मौसम के गर्म मिजाज के साथ ही नहरी पानी का टोटा किसानों के लिए संकट बना हुआ है। नहरी विभाग की ओर से इस समय प्रत्येक नहर में माह में 16 दिन बारीबंदी रहती है और महज 8 दिन ही पानी चलता है। जिला में इस समय करीब 126 नहरें हैं और अधिकांश नहरों में पानी नहीं है। इस वजह से बिजाई प्रभावित होने की संभावना है। इस बार जिला में करीब 1 लाख 87 हजार हैक्टेयर में कॉटन की काश्त हो चुकी है। सिरसा हरियाणा में सर्वाधिक कपास पैदा करने वाला जिला है। सिरसा में इसके अलावा करीब 70 हजार हैक्टेयर में धान की काश्त भी की जानी है। सिंचित जल की कमी के चलते उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। अब किसान सूखी नहरों से ऊब कर आसमान की ओर टिकअिकी लगाई हुई है कि कब मेघा बरसे और झुलस रही नरमा कपास की फ सल जला देने वाली इस तपिश से बचे।
कृषि विभाग की ओर से 15 जून से धान की बिजाई का वक्त उचित बताया गया है। जिला में अधिकांश किसान नहरी पानी एवं घघर पर ही आश्रित हैं। जिला में करीब 126 छोटी बड़ी माइनर एवं डिस्ट्रीब्यूटरी हैं। जिला में करीब अढ़ाई लाख एकड़ भूमि घघर से सिंचित होती है। इसके अलावा करीब 42 हजार नलकूप हैं, जिनमें अधिकांश नकारा हो चुके हैं। किसानों के अनुसार इस समय घघर में भी पर्यापत पानी नहीं है और थोड़ा बहुत पानी है भी वो भी कैमिकलयुक्त है। इस समय नहरों में बारीबंदी प्रणाली के चलते किसानों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। किसान सोमप्रकाश, गिरधारी सहारण, सुनील धवन, सुभाष श्योराण ने बताया कि नहरों में पानी न होने के चलते खेत की बुआई और खेत को बिजाई के लिए तैयार करने में देरी हो रही है। किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो बिजाई प्रभावित हो सकती है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता राजेश कुमार से जब इस संदर्भ में पूछा गया तो बताया कि सिरसा में उचित तरीके से नहरी पानी आ रहा है। पानी की किसी तरह की कोई कमी नहीं है। सभी नहरों में बारीबंदी के हिसाब से पानी दिया जा रहा है। इस समय 16 दिन की बारीबंदी है और माह में एक नहर में करीब 8 दिन पानी चल रहा है।’
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